संविधान की धारा चार में बताया गया कि जिस राज्य में जनजाति समुदाय निवास करता है वहां जनजाति सलाहकार परिषद का गठन करना अनिवार्य है मगर उत्तराखण्ड राज्य की स्थापना हुए 14 वर्ष पूर्ण हो गये है और अब तक यहां पर जनजाति सलाहकार परिषद का गठन नहीं हो पाया है। यह उद्गार पिछले दिनों जौनसार-बावर जनजाति क्षेत्र में हिमालयन जन कल्याण एवं बाल विकास समिति के सहयोग से चलाये जा रहे जनजागरूकता अभियान के दौरान ‘‘जन आस्था मंच’’ के कलाकारो ने प्रस्तुत ‘‘गोठ्यारू परेशान क्यों’’ नुक्कड़-नाटक से सामने रखी।
ज्ञात हो कि इस नुक्कड़-नाटक में जनजाति समुदाय से जुड़े विकास के पहलुओं को रंगकर्मीयों ने संवाद और गीतो के माध्ययम से बंया किया। बताया गया कि राज्य सरकार जो भी मौजूदा जनजाति समुदाय की जनसंख्या के लिए कुल बजट का प्राविधान रखती है उसका राज्य में महज खानापूर्ती ही हो रही है। इस कारण विकास के पायदान से जनजाति समुदाय का फासला बनता जा रहा है। नुक्कड़-नाटक के संवादो में जिस तरह से उपेक्षित समाज की पीड़ा को रेखांकित किया उसी तरह सरकार की तमाम योजनाओं की जानकारी लोगो तक पंहुचाने में नाट्य रूपातंरण करके चरित-चित्रण किया गया है। नुक्कड़-नाटक के गीत विशेषकर युवाओं को झकझोर रहे थे कि ‘‘आज देश की तरूणाई को अपना फर्ज निभाना है, निगल रहे हैं देश को जालिम इनसे देश बचाना है। परेशानी बहुत भुला आज गांव समाज मां, घुसखोरी कू राज होयूं आज ये समाज मां। एवं ग्राम योजना गांव बनायें, जन-जन में उत्साह भरें यदि सरकार विकास योग्य है इनका हम सम्मान करें’’ जैसे संदेशात्मक गीत दर्शाको को उद्वेलित कर रहे थे। ये गीत व संवाद कभी हास्य तो कभी रूदन व कभी लोगो को संघर्ष के लिए ललकार रहे थे। नुक्कड़-नाटक सवाल खड़ा कर रहा था कि राज्य में जनजाति सलाहकार परिषद का न होना भी राजनीतिक षडयन्त्र है तो वहीं जनजाति उपयोजना की जानकारी से समुदाय को वंचित रखाना भी सत्ता-व्यवस्था की विफलता है।
इस अभियान की शुरूआत देहरादून जनपद अन्तर्गत कालसी ब्लाॅक की ग्राम पंचायत बोहरी से हुई। यह अभियान क्रमशः नैवी, कोरूवा, सैंसा, उद्पाल्टा, कनबुआ, लोरली, कोठा, तारली, समाल्टा, ददौली गांवो होते हुए तहसील मुख्यालय चकराता तक एक सप्ताह तक चला। इस दौरान ग्राम पंचायत नैवी के प्रधान मोहन शर्मा, उद्पाल्टा के ग्राम प्रधान सतपाल राम एवं कालसी के खण्ड विकास अधिकारी वी.पी. खण्डूड़ी भी सरीक हुए। ग्राम प्रधान मोहन शर्मा ने कहा कि इस राज्य का दुर्भाग्य है कि 14 वर्ष बितने के बावजूद भी सरकारों ने जनजाति सलाहकार परिषद नहीं बना पाया। जबकि कई उच्चस्थ पदो पर जनजाति समुदाय के अधिकारी और सरकार में जिम्मेदार जनप्रतिनिधी रहे हैं। उन्होने कहा कि वे इस अभियान को राज्यभर में चलायेगे और जन समर्थन जुटाकर सरकार से जानना चाहेगे कि जनजाति समुदाय का यह संवैधानिक अधिकार की क्यों मुखालाफत हो रही है। ‘‘गोठ्यारू परेशान क्यों’’ नुक्कड़-नाटक में यमुना घाटी के प्रसिद्ध लोक गायक अनिल बेसारी, उत्तराखण्डी लोक संगीतकार सुनिल बेसारी, उत्तराखण्डी चलचित्रो की अभिनेत्री रेखा, चांदनी, अभिनेता अमित शर्मा, प्रकाश् माही ने अभिनय किया तो क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता व हिमविकास संस्था से जुड़े ईलम सिंह व सुमित्रा जोशी ने इस अभियान में भरसक सहयोग किया है।