मानवजनित प्राकृतिक विदोहन से बढ़े मौसम परिवर्तन के खतरे
प्रेम पंचोली
मध्यांचल फोरम इन्दौर और माण्टेन फोरम हिमालय देहरादून के संयुक्त तत्वाधान में ‘मौसम परिवर्तन अनुकूलन एवं हिमालय समुदाय’’ विषय पर तीन दिवसीय सेमिनार देहरादून में संपन्न हुयी है. तीन दिन तक राज्य के विभिन्न जगहो से आये प्रतिभागीयो ने हिमालय क्षेत्र में हो रहे प्राकृतिक परिवर्तन पर चिन्तन किया। सेमिनार का उद्घाटन करते हुए प्रमुख वन संरक्षक उतराखण्ड जयराज ने कहा कि पिछले 10 वर्षो के दौरान वन संरक्षण में लोगो की भागीदारी कम ही हो रही है। इसलिए फिर से समुदाय और जिम्मेदार विभाग को आपसी समन्वय से वन संरक्षण के कार्यो को आगे बढाना होगा. उन्होने कहा कि मौसम परिवर्तन का कारण प्राकृतिक है, परन्तु प्राकृतिक संसाधनो के सरक्षण के लिए लोगो को संवेदनशील बनना होगा।उल्लेखनीय है कि इस दौरान हिमालय क्षेत्रो में हो रहे मौसम परिवर्तन को लेकर मध्यांचल फोरम इन्दौर और माण्टेन फोरम हिमालय देहरादून के संयुक्त तत्वाधान में एक अध्ययन किया गया है। अध्ययन रिपोर्ट को प्रस्तुत करते हुए लोगो ने कहा कि रिपोर्ट में जो सवाल उठाये गये है वह लोगो की दिनचर्या बनती जा रही है। लोग अपने प्राकृतिक संसाधनो से विमुख होते जा रहे है। प्रतिभागियो ने सवाल खड़ा किया कि जब से प्राकृतिक संसाधनो पर सरकारी हस्तक्षेप बढे है, तब से लोगो के दिलो में वन, जल, व जमीन के प्रति खौप जैसी समस्या पैदा हुयी है। नतिजा यह हुआ कि प्राकृतिक संसाधनो पर व्यापारिक प्रभाव सर्वाधिक बढे है। इसलिए मौसम परिवर्तन के खतरे आज मुहंबाये खड़े है।
इस दौरान प्रो. विरेन्द्र पैन्यूली ने कहा कि उत्तराखंड राज्य में वन विभाग जलवायु परिवर्तन की नोडल एजेन्सी है इसलिए विभाग को जनता का विश्वास जीतना होगा। जलवायु परिवर्तन के न्यूनिकरण एवं अनुकूलन के लिए आगामी रणनीति और कार्यक्रमोें पर भी चर्चा की जायेगी। कहा की वन विभाग जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सघनता से काम कर रहा है। जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना के निर्माण में वन विभाग की मुख्य भूमिका रही है।
इस दौरान माउन्टेन फोरम के सुरेश सतपथी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव आंकलन के लिए हिमांचल और उतराखण्ड में 36 गांवों का एक अध्ययन किया गया है। जिसमें 14913 लोगो का साक्षात्कार लिया गया है।
मध्यांचल फोरम के सन्तोष सामल ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनो का दोहन और संरक्षण लोक सहभागिता से होना चाहिए ताकि पर्यावरण का सन्तुलन बना रहे। उन्होंने कहा की प्राकृतिक आपदा का सर्वाधिक दंश निम्न वर्ग के लोगो को भोगना होता है।
पर्यावरण कार्यकर्ता द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने बताया कि लोगो का रूझान नगदी फसल की तरफ तो बढा है परन्तु शुद्ध पेयजल की समस्या भी बड़ी तेजी से बढ़ी हैं। कहा की मनरेगा के तहत बनने वाली चालखाल को वनो और जगलो के बीच बनाने के प्रयास किये जाये। इसके लिए ग्राम पंचायतां को स्वतन्त्र अधिकार दिये जाये। सामाजिक कार्यकर्ता नागेन्द दत ने सुझाव दिया कि ग्राम स्तर पर जो महिलाओ के समूह है उन्हे वनाग्नी के कामो से जोड़ा जाये। ताकि वन संरक्षण के प्रति लोक सहभागिता बढ़ सके।
इस दौरान ‘मौसम परिवर्तन अनुकूलन एवं हिमालय समुदाय’’ नाम से एक अध्ययन रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि पहाड़ी क्षेत्रो में पारंरिक खेती में कमी आई है, रासायनिक खादो का प्रचलन भारी मात्रा में बढ़ा है, नगदी फसलो का प्रचलन तो बढ़ा मगर लोगो की निरर्भता बाजार पर हो गयी। जिस कारण पोषण की मात्रा में भारी कमी आई है। रिपोर्ट बता रही है कि इस असन्तुलन के कारण फसल चक्र, बरसात व ऊंचाई के क्षेत्रो में कम हिमपात का होना भी मौसम परिवर्तन का कारण बनता जा रहा है। रिपोर्ट को प्रस्तुत करते हुए किशोर नौटियाल ने कहा कि माउंटेन फोरम हिमालय के द्वारा उत्तराखंड और हिमाचल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने के लिये ग्राम स्तर पर स्वैच्छिक संगठनो के साथ मिलकर अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन में उच्च हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों, कृषि, स्थानीय जन जीवन और मौसम में जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले बदलावों और स्थानीय समाज द्वारा उसके न्यूनिकरण व अनुकूलन के उपायों पर समझ बनाने का प्रयास भी किया गया है। इस अवसर पर उतरकाशी से नागेन्द्र दत, रूद्रप्रयाग से बैसाखी लाल, द्वारिका प्रसाद सेमवाल, वरिष्ठ पत्रकार महिपाल नेगी, सर्वोदय कार्यकर्ता साबसिंह सजवाण, पिथौराग-सजय से सुभाष जोशी, भगवान सिंह, विशन सिंह, कुसुम घिल्डियाल, इण्डिया वाटर पोर्टल के संपादक सिराज केशर, बबीता, मंजू देवी, सरिता देवी, विनिता देवी, खुशपाल सिंह आदि मौजूद रहे.
माउंटेन फोरम हिमायल एक परिचय
माउंटेन फोरम हिमायल विगत् पन्द्रह वर्षो से पर्वतीय राज्य उत्तराखंड और हिमाचल में स्थानीय स्व-शासन में महिलाओं, वंचित वर्ग और आम जन की भागीदारी को मजबूत करने के प्रयासों को स्थानीय समुदाय, ग्राम स्तरीय संगठन, स्वयं सेवी संगठन और सरकार के साथ मिलकर रचनात्मक कार्य कर रहा है। चुनाव से पूर्व मतदाता जागरूकता अभियान जैसी गतिविधियों के जागरूकता कार्यक्रम चालता है. आपदा प्रबन्धन, स्थानीय स्वशासन और महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर कार्य भी कर रहा है।



