प्रेम पंचोली
लोक संस्कृति के संजीव चरित-चित्रण का अगाज पिछले 15 वर्षो से लाखामण्डल में होते आया है। जो अब राजधानी देहरादून में भी ‘‘उत्तराखण्ड माघ महोत्सव’’ के नाम से भी पिछले दो वर्षो से आयोजित होते आ रहा है। यह कोई ऐतिहासिक मेला नही है बल्कि जौनसार-बावर क्षेत्र विकास समिति द्वारा आयोजित ‘‘विस्सू महोत्सव व उत्तराखण्ड माघ महोत्सव’’ है जो अब लोक में स्थापित हो गया है। लोग इन महोत्सवो का श्रेय गीताराम गौड़ को ही दे रहे हैं।
ज्ञात हो कि श्री गौड़ अपने छात्र जीवन के दौरान से ही अपने पैत्रिक गांव लाखामण्डल में ‘‘विस्सू महोत्सव’’ का आयोजन करते आया है। यह उनका आयोजनभर ही नहीं है वे तो विविध रंगकर्मियों को एक मंच पर उतारते है। जब आप अप्रैल माह में लाखामण्डल में होंगे तो यदा-कदा पूरी इस विस्सू महोत्सव की चर्चाऐं आम होगी। बल्कि सम्पूर्ण यमुना घाटी में लोग वर्षभर इस महोत्सव का इन्तजार करते हैं। जबकि लाखामण्डल में ही 15 अप्रैल को भी एक मेले का आयोजन ऐतिहासिक रूप से आयोजित होते आया है। मगर जौनसार-बावर क्षेत्र विकास समिति द्वारा आयोजित ‘‘विस्सू महोत्सव’’ की खूशबू ही है कि लोग 15 वर्षो से लगातार इस महोत्सव के इन्तजार में सरेआम दिखते है। समिति का मात्र इतना ही काम नहीं रह जाता है यह समिति अब राज्य की पांचो जनजातियों के अधिकारो के लिए भी संघर्षरत दिखती है। यही वजह है कि पिछले दो वर्षो से समिति राजधानी देहरादून में राज्य की पांचो जनजातियों को एकत्रित कर उनके विकासीय कार्यो पर बहस को आगे बढाते है तथा उनकी समस्याओं को मीडिया और शासन-प्रशासन तक पंहुचाने का काम भी समिति एक भव्य आयोजन करके जनजातियों की संयुक्त आवाज के रूप में प्रस्तुत करती है।
उल्लेखनीय हो कि जहां समिति लोक संस्कृति के प्रति सजग दिखती है वहीं समिति वर्षभर जनजाति क्षेत्र में लोगो की समस्याओं के समाधान हेतु सरकार के साथ संवाद कायम रखती है। इसी का नतिजा है कि वर्ष में दो बार आयोजित होने वाले महोत्सव में राज्य सरकार में बैठे जनता के नुमाईन्दे अपनी उपस्थिति दर्ज करने में पीछे नहीं रहते। महोत्सव में सिर्फ रंगा-रंग कार्यक्रम ही पेश नही होते इस दौरान लोग सरकारी योजनाओं की जानकारी हासिल करते हैं तो स्वास्थ्य सेवाओं का भी फायदा उठाते हैं। अब क्षेत्र में लोग गीताराम को देखकर एक ही शब्द का उचारण करते है कि गौड़ साहब फिर कुछ और नहीं हो रहा है। और के मायने में लोगो का सीधा अर्थ है कि उन्हे ऐसे आयोजनो से उन अधिकारियों से काम लेने में सहूलियत होती है।
जौनसार-बावर क्षेत्र विकास समिति मौजूदा समय में अपने कार्यक्रमों को पांचो जनजातियों पर फोकस कर रही है। समिति जनजातियों की समस्यायों को सरकार तक पंहुचाने के लिए लगातार संघर्षरत रहती है। वे गोष्ठी, विमर्श व महोत्सव के माध्ययम से जनता और सरकार के बीच संवाद कायम करने में सफल होती दिख रही है। समिति ने चाहे ट्राईबल सब प्लान की बात हो या जनजातीय गांव में सड़क, विद्युत, पानी, स्वास्थ्य व शिक्षा का मसला हो, ऐसे मूलभूत आवश्यकताओं पर समिति लगातार सरकार के साथ संवाद कायम रखी हुई। जिसका जीताजागता उदाहरण लाखामण्डल में दिखाई देता है। इसके अलावा यदि लोक संस्कृति के संरक्षण की बात करें तो समिति अपने आयोजन में लोगो की सहभागीता को प्रमुखता देती है। यही कारण है कि मुनस्यारी के लोक कलाकार लाखामण्डल के जौनसार क्षेत्र में होते हैं तो वही नीति-माणा और हिमांचल के ठेट लाहूल-स्पीती के कलाकार सहित राज्य के विभिन्न भागो से आये हुए रंगकर्मी भी अपनी प्रस्तुति के लिए सीना फुलाये दिखते हैं। जनजातियों की यह बहुविविधतापूर्ण संस्कृति का सजीव चरित चित्रण जौनसार-बावर क्षेत्र विकास समिति के तत्वाधान में लाखामण्डल और देहरादून में आयोजित होने वाले महोत्सव में ही लोगो को देखने को मिलता है।
संघर्ष से मिली प्रेरणा
विज्ञान विषय से स्नातक गीता राम गौड़ कभी सरकारी सेवा के मोहपास में नहीं आया और छात्र जीवन से ही जन सेवा में तल्लीन हो गये। जन सेवा उन्हे कहीं विरासत में नही मिली बल्कि उन्हे तो जन सेवा के लिए संघर्षो के थपेड़े ने प्रेरित किया है। गीताराम गौड़ की प्राईमरी व जूनियर की पढाई के दौरान के संस्मरण ही चैकाने वाले हैं। उनके पीताजी कोई उच्च शिक्षित नहीं थे परन्तु उनकी जीज्ञासा थी कि उनका पुत्र पढ-लिखकर सरकारी सेवा में जायेगा तो उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आयेगा। इसलिए उन्होने गीताराम को दूर नौगांव स्थित आगे की पडाई के लिए भेज दिया। गीताराम ने अपने पीताजी के संघर्ष को देखते हुए उन्ही दिनों मन बना लिया था कि वे भविष्य में जन सेवा के कार्य करेगा। उत्तरकाशी के नौगांव इण्टर काॅलेज के बाद डीएवी काॅलेज में दाखिला लिया। इन्ही दिनों गीताराम ने यानि सन 1998 में जौनसार-बावर छात्र संघ अध्यक्ष का पद संभाल लिया। बस इसके बाद से गीताराम ने पीछे नहीं देखा और 1999 में जौनसार-बावर क्षेत्र विकास समिति का गठन कर डाला। यही नहीं उन्हे अपने निकटतम मूरतराम शर्मा का सानिध्य मिला तो भाजपा के भी सक्रीय कार्यकर्ताओं में सममलित हो गये। वर्तमान में वे भाजपा के अनुसूचित जाति व जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी है। वे मानते हैं कि विकास के काम की धार बिना राजनीति के नहीं हो सकती। वरन् विकास के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करना होता है। इसलिए जौनसार-बावर क्षेत्र विकास समिति के कार्यो के साथ लगातार जुड़ा रहता हूं।

