Monday, July 23, 2018

न्यायालय का फरमान और उनके अरमान


न्यायालय का फरमान और उनके अरमान

प्रेम पंचोली

राज्य बनने के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि न्यायालय के डण्डे से सरकार को देहरादून में अतिक्रमण हटाना पड़ा। वह भी तब जब राज्य के वरिष्ट पत्रकार मनमोहन लखेड़ा ने उच्च न्यायालय नैनीताल में एक वाद दायर किया था, कि देहरादून की सड़को व फुटपाथो पर अति अतिक्रमण होने जा रहा है। जिससे राजधानी में आने-जाने वाले लोगो को समस्या तो हो ही रही है बल्कि इस अस्थाई राजधानी में असामाजिक तत्वों का अड्डा भी बनता जा रहा है। हुआ यूं कि सरकार ने इस वाद के खिलाफ न्यायालय में अपना पक्ष रखना मुनासिब नहीं समझा और न्यायालय को एक तरफा फैसला सुनाना पड़ा। जिसका हस्र यह हुआ कि अतिक्रमण की मार उन लोगो पर सर्वाधिक पड़ी जो देहरादून शहर से हटकर निवास करते है जैस मलीन बस्ती आदि। मगर देहरादून के मुख्य मार्गो पर कब्जे जमाये हुए राजनीतिक पंहुच वालो पर अब तक कोई फर्क पड़ता हुआ नजर नहीं आ रहा है।
ज्ञात हो कि अट्ठारह वर्ष के दौरान देहरादून की शान्त वादियां, काॅलोनी, बस्तीयां, माॅल्स, फ्लैट्स व सड़को पर मोटर वाहनो की कतार ने अशान्त बना दिया है। यह हुआ कैसा जो सबके सामने हैं। लोग पहाड़ो से नीचे उतर रहे हैं तो बाहरी प्रदेशो के लोग रोजगार बावत देहरादून को अड्डा बना रहे हैं। इस बीच देहरादून घोर अतिक्रमण की चपेट में आ चुका है। यहां देखने वाली बात यह है कि देहरादून के मुख्य मार्गो पर बड़े-बड़े बिल्डरों ने माॅल्स, फ्लैट्स व अन्य व्यवसायिक गतिविधियों के लिए कब्जे अपने राजनीतिक पंहुच के चलते जमाये हुए हैं। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सरकार द्वारा चलाये जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दायरे में सबसे पहले मलीन बस्तियां और मौहल्ले आये है। जबकि राजपुर रोड़ सहित अन्य मुख्य मार्गो पर अतिक्रमण की कहानी यथावत है। प्रश्न इस बात का है कि क्या उच्च न्यायालय ने सिर्फ व सिर्फ मलीन बस्तियों को अतिक्रमण के दायरे में माना है? क्या राजपुर रोड़ व अन्य मुख्य मार्गो पर कब्जे जामाये व्यवसायिक प्रतिष्ठान अतिक्रमण के दायरे में नही आ रहे है। यह बिडम्बना ही कहिऐ कि हमेशा कानून का डण्डा गरीब व कमजोर लोगो के ऊपर ही प्रयोग किया जाता है। जो इस दौरान देहरादून में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान में साफ-साफ दिखाई दे रहा है। 
काबिलेगौर हो कि देहरादून की मलीन बस्तियों में ऐसे लोग निवास करते हैं जो अधिकांश शहर को स्वच्छ रखने में बड़ी भूमिका निभाते है। इसके अलावा मलीन बस्तियों के अन्य लोग अपने रोजगार की तलाश में आकर यहां बस गये है। बता दें कि देहरादून की मलीन बस्तियां किसी भी मुख्य मार्ग पर कब्जा नही किये हुऐ है वे तो सिर्फ अपने सिर छुपाने के लिए नदियों के किनारे-किनारे मुश्किल से अमूमन 300 से 400 वर्ग फिट में कच्चे-पक्के मकान बनाकर रह रहे हैं। इनके कारण ना तो कोई नदी का रूख बदला है और ना ही मलीन बस्तियों के कारण देहरादून का सामाजिक सौहार्द बिगड़ा है। यदि देहरादून का सामाजिक सौहार्द बिगड़ रहा है तो वह देहरादून के मुख्य मार्गो पर हो रहे बेतरतीब व अवैज्ञानिक कब्जो के कारण। जिसकी कई सूचनाऐं पुलिस के पास अलग-अलग झगड़ा फसादांे पर हुई रिपोर्टो से पुष्ट होती है। अतिक्रमण के नाम से उजाड़े जा रही मलीन बस्तियों के हजारो लोग अब फिर से सड़को पर आ गये हैं। उन्हे एक बात का मलाल है कि वे अतिक्रमण के दायरे में हैं और उन्हें भी न्यायालय का डण्डा दिखाया जा रहा है, पर जो लोग देहरादून के मुख्य मार्गो पर कब्जा बैठाये हुए है उन्हे ना तो हटाया जा रहा है और ना ही उन्हे कानून की फिक्र है।
उल्लेखनीय हो कि अकेले देहरादून में 129 मलिन बस्तियां हैं। जो लगभग 1977 से 1980 के आस-पास ही बस चुकी थी। यह बस्तियां क्रमशः रिस्पना, बिंदाल, ऋषि नगर और राजपुर आदि क्षेत्रों में बसी है। बताया जाता है कि इन बस्तियों में लगभग 70 प्रतिशत की जनसंख्या अनुसूचित जातियों की है। इधर वे लोग अब अवैध रूप से बसे हैं ऐसा की उन्हे बार-बार बताया जाता है। बता दें कि मगर मलिन बस्तियों के लोग बिजली का बिल ,पानी का बिल, नगर निगम को टैक्स इत्यादि नियमित रूप से 80 के दशक से देतेे आ रहे है। यही नहीं इन बस्तियों के हर व्यक्ति के पास वोटर कार्ड, आधार कार्ड है, स्थाई निवास प्रमाण पत्र जैसे तमाम ऐसे प्रमाणपत्र हैं जो इन्हे बस्तियों में निवास करने का प्रमाण पुख्ता करते हैं। फलस्वरूप इसके राजपुर विधानसभा के पूर्व विधायक राजकुमार गला फाड़-फाड़कर और बस्तियों में जा-जाकर चिल्लाते हैं कि कांग्रेस के शासनकाल यानि 2016 में मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देना शुरु कर दिया था, साथ-साथ इन बस्तियों के रखरखाव के लिए 400 करोड़ का एक बजट भी स्वीकृत करवाया गया था। आज निर्वतमान हो चुके राजकुमार विधायक तत्काल कांग्रेस में रहते हुए मलीन बस्तियों को मालीकाना हक नहीं दिला पाये हां इतना जरूर हुआ कि पूर्व विधायक राजकुमार मलीन बस्तियों के कारण मीडिया की सुर्खियों में अवश्य आये हैं।
बताया जाता है कि पिछली कांग्रेसनीत सरकार ने यानि साल 2016 में एक अधिसूचना जारी की है। जिसका अनुपालन निदेशक शहरी विकास निदेशालय को करवाना था। निदेशालय को उत्तराखंड राज्य की नगर निकाय अवस्थित मलिन बस्तियों के सुधार विनियमितीकरण पुनर्वास  पुनर्स्थापन तथा उनसे संबंधित व्यवस्थाओं एवं अतिक्रमण निषेध नियमावली 2016 को क्रियान्वयन करना था। सो हालात यह हो गई कि मलीन बस्तियों के लोगो को अब खुले आसमान के नीचे ही बसेरा करना होगा।

क्या कहती है अतिक्रमण निषेध नियमावली 2016

इस नियमावली का संक्षिप्त नाम उत्तराखंड राज्य की  नगर  निकायों में अवस्थित मलिन बस्तियो के सुधार विनियमितीकरण ,पुनर्वासन, पुनर्स्थापन तथा उससे संबंधित व्यवस्थाओं एवं अतिक्रमण निषेध नियमावली 2016 है। जिसे उत्तराखंड राज्य की सभी नगर निकायों में लागू होना था। यह नियमावली कहती है कि मलिन बस्तियां आज पूर्ण रूप से परिभाषित है। जिसकी पुष्टी के लिए जिलाधिकारी की संस्तुति अनिवार्य होगी। इसमें यह भी कहा गया कि मलीन बस्ती में रहने वाले परिवार ही नियमितीकरण के दायरे में होंगे। जिसे जिलाधिकारी के संज्ञान में लाते हुए बस्तियों के सुधार विनियमितीकरण पुनर्वास, पुनर्स्थापन, अतिक्रमण निषेध अधिनियम 2016 के अन्र्तगत लाया जाये। इसके अलाया विनियमितीकरण श्रेणी एक में कहा गया कि मलिन बस्ती को स्व-स्थान पर ही प्रदत्त भू-स्वामित्व का अधिकार दिया जाना चाहिए। जबकि पुनर्वास बावत पुनर्स्थापन स्थल की दूरी को यथासंभव न्यूनतम रखा जाए जिससे आजीविका पर अनावश्यक प्रभाव ना पड़े। इसके लिए बाकायदा विशेष आजीविका परक कार्यक्रम चलाने की भी योजना हो। जबकि इस अधिनियम को क्रियान्वित करने के लिए एक राज्य स्तरीय अनुसरण समिति का गठन होना भी बताया गया है। इस अनुसरण समिति की प्रबन्धकारणी में सचिव नगर विकास, सचिव राजस्व विभाग, प्रमुख सचिव आवास विभाग, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य विभाग, प्रमुख सचिव सिंचाई विभाग, प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण विभाग, एक आयुक्त सदस्य को नामित किया गया था। जबकि यह राज्य स्तरीय समिति प्रत्येक माह में अनिवार्य रूप से एक बैठक आयोजित करेगी। मगर यह बैठक कागजो तक ही सीमित रह गई। इस  नियमावली में यह भी प्राविधान है कि कृत कार्यवाही एवं निर्णय के विरुद्ध प्रभावित पक्ष द्वारा एक माह की समय अवधि संबंधित मंडल के मंडलायुक्त के समक्ष ही रखी जायेगी। यही नहीं इस नियमावली में बताया गया कि राज्य सरकार की भूमि पर 2017 के पश्चात किया जाने वाला कोई भी कब्जा दंडनीय अपराध होगा। जिला अधिकारी अथवा उनके द्वारा अधिकृत प्राधिकारी तथा संबंधित विभाग भूमि जिनकी भूमि पर उपरोक्तअनुसार कब्जा किया जाता है के लिए सक्षम प्राधिकारी ऐसे कानूनी कदम उठाने के लिए सक्षम होंगे। यह भी प्राविधान है कि जो राज्य सरकार की भूमि पर कब्जे तथा अधिसूचित मलिन बस्तियों में नए कब्जे करते हुए पाया जाये और कब्जा करने के लिए उकसाने का माहौल बनाने वाले के विरूद्ध भी अधिनियम में दण्डकारी कानूनी प्राविधान है तथा ऐसे के विरूद्ध जिला अधिकारी अथवा उनके द्वारा अधिकृत संबंधित विभाग सक्षम न्यायालय में वाद करने के लिए स्वतन्त्र होंगे।

Thursday, July 19, 2018

गंगा के उदगम में हरे पेडो को बचाने की मुहिम


गंगा के उदगम में हरे पेडो को बचाने की मुहिम 


ऊचाई पर पेड रहेंगे, नदी ग्लेश्यर टिके रहेंगे । चाहे जो मजबूरी होगी, सडक सुक्की बैड से झाला ही रहेगी। के नारो के साथ 18 जुलाई, 2018 को भागीरथी के उदगम में बसे सुक्की, जसपुर, पुराली, झाला के लोगों ने रैली निकालकर प्रसिद्व गाॅधीवादी और इन्दिरागाॅधी पर्यावरण पुरस्कार से सम्मानित राधा बहन, जसपुर की प्रधान मीना रौतेला, समाजसेविका हिमला डंगवाल के नेतृत्व में पेडो पर रक्षासूत्र बाॅधे गये। इसकी अध्यक्षता   सुक्की गाॅव की  मीना राणा ने की। राधा बहन ने कहा कि हिमालय क्षेत्र की जलवायु और मौसम में हो रहे परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिये सघन वनों की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि सीमान्त क्षेत्रों में रह रहे लोगो की खुशहाली, आजीविका संवर्धन और पलायन रोकने के लिये पर्यावरण और विकास के बीच में सामंजस्य जरूरी है। सीमा की सुरक्षा में लगे सैनिको को यहां पर बसे हुये लोग नैतिक समर्थन देते है। अत; इनके दैनिक जीवन को खुशहाल रखना जरूरी है।

इस दौरान सुक्की और जसपुर दो स्थानों पर हुई बैठक में जिला पंचायत के सदस्य जितेन्द्र सिंह राणा ,क्षेत्र पंचायत सदस्य धर्मेन्द्र सिंह राणा,झाला गाॅव के पूर्व प्रधान विजय सिंह रौतैला, पूर्व प्रधान किशन सिह, पूर्व प्रधान शुलोचना देवी, मोहन सिंह राणा, पूर्व प्रधान गोविन्द सिंह राणा आदि ने सुक्की बैड से जसपुर,झाला राष्ट्रीय राजमार्ग को यथावत रखने की माॅग की है। इन्होने सुक्की बैड से झाला तक प्रस्तावित आॅलवेदर रोड के निर्माण का विरोध करते हुये कहा कि यहाॅ से हजारों देवदार जैसी दुर्लभ प्रजातियांेको खतरा है। इसके साथ ही यह क्षेत्र  कस्तूरी मृग जैसे वन्य जीवो की अनेको प्रजातियों का एक सुरक्षित स्थान है। यहाॅ बहुत गहरे में बह रही भीगीरथी नदी के आर- पार खडी चटटानें और बडे भूस्खलन का क्षेत्र बनता जा रहा है। इसलिये यह प्रस्तावित मार्ग जैव विविधता और पर्यावरण को भारी क्षति पहुॅचायेगा। यहाॅ लोगो  का कहना है  कि उन्होने आजादी के बाद सीमान्त क्षेत्र तक सडक पहुॅचाने के लिये अपनी पुस्तैनी जमीन, चारागाह और जंगल निशुल्क सरकार को दिये है।  इस संबन्ध में लोगो ने केन्द्र सरकार से लेकर जिलाधिकारी उत्तरकाशी तक पत्र भेजा है।

लोग यहाॅ बहुत चिन्तित है कि उन्होने वर्षो से अपनी पसीने की कमाई तथा बैको से कर्ज लेकर होटल, ढाबे, सेब के बगीचे तैयार किये है। यहाॅ पर वे आलू, रामदाना राजमा सब्जियाॅ उगाकर कमाई करते है।इसके कारण लोग यहाॅ से पलायन नही करते है। आॅलवेदर रोड के नाम पर राष्ट्रीय राजमार्ग को चैडा करने से सुक्की, जसपुर, पुराली, झाला के लोग विकास की मुख्य धारा से अलग-थलग पड जायेंगे। और उनके कृषि उत्पादो की ब्रिकी पर प्रभाव पडेगा। होटल पर्यटको औरतीर्थ यात्रियों के बिना सुनसान हो जायेगे।नैनीताल से सामाजिक कार्यकर्ता इस्लाम हुस्सैन ने कहा कि पर्यावरण की दृष्टि से सेब आदि पेडो के विकास व संरक्षण के लिये देवदार जैसे पेड सामने होने चाहिये।उन्होने कहा कि पेड पौघो को जीवित प्राणियों की तरह जीने का अधिकार है। यह बात केवल हम नही बल्कि पिछले दिनो नैनीताल के उच्च न्यायालय ने कही है। इसलिये देवदार के पेडो की रक्षा के साथ वन्य जीवों की सुरक्षा का दायित्व भी राज्य सरकार का है।

रक्षासूत्र आन्दोलन के पे्ररक सुरेश भाई ने कहा कि  स्थानीय लोग अपनी आजीविका की चिन्ता के साथ यहाॅ सुक्की बैड से जाॅगला तक हजारो  देवदार के पेडो के कटान का विरोध करने लगे है। यहाॅ आॅलवेदर रोड के नाम पर 6-7 हजार से अधिक पेडो को काटने के लिये चिन्हित किया गया है। यदि इनको काटा गया तो एक पेड दस छोटे- बडे पेडो को नुकसान पहॅुचायेगा इसका सीधा अर्थ है लगभग एक लाख वनपस्तियाॅ प्रभावित होगी। इसके अलावा वन्य जीवों का नुकसान है। इसका जायजा वन्य जीव संस्थान को भी लेना चाहिये। जिसकी रक्षा करना सरकार  की जिम्मेदारी है।

इन हरे देवदार केपेडो को बचाने के लिये लोग जसपुर से पुराली बगोरी, हर्षिल, मुखवा से जाॅगला तक नयी आॅलवेदर रोड बनाने की माॅग कर रहे है।यहां बहुत ही न्यूनतम पेड और ढालदार चटटान है इसके साथ ही इस नये स्थान पर कोई बर्फीले तूफान का भय नही है। स्थानीय लोगो का कहना है कि जसपुर से झाला, धराली, जाॅगला तक बने गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग को भी अधिकतम 7 मीटर तक चैडा करने से ही हजारो देवदार के पेड बचाये जा सकते है।इसके नजदीक गौमुख ग्लेश्यर है। इस संबंध में हर्षिल की  ग्राम प्रधान बसंती नेगी ने भी प्रधानमंत्री जी को पत्र भेजा है। यहाँ लोगो ने भविष्य में प्रसिद्व पर्यावरण विद चंडीप्रसाद भटट, नैश्नल ग्रीन टीब्यूनल, वन्य जीव संस्थान, काॅमन काॅज के प्रतिनिधियों को बुलाने की पेशकश की है।

इसके साथ ही स्थानीय लोगो और पर्यावरणविदों की माॅग के अनुसार एक जन सुनवाई आयोजित करने की पहल भी कि जा रही है। इस अवसर पर  गाॅव के लोग भारी सख्या में उपस्थित रहे, जिसमेंसामाजिक कार्यकर्ता बी वी मार्थण्ड, महेन्द्र सिह, नत्थी सिह, विजय सिह, सुन्दरा देवी बिमला देवी हेमा देवी कमला देवी, रीता बहन, युद्ववीर सिंह आदि दर्जनो लोगो ने अपने विचार व्यक्त किये है।

Saturday, July 14, 2018

प्रतापनगर के लिए विशेष भर्ती मेला

प्रतापनगर के लिए विशेष भर्ती मेला 



यूथ फाउंडेशन द्वारा 16 जुलाई को टिहरी जनपद के अंतर्गत  प्रतापनगर ब्लॉक के जीआईसी, ओखलाखाल में सेना भर्ती मेले का आयोजन किया जा रहा है! इस मेले की खास बात यह है की इस दौरान युवा एवम युवतियां दोनों भर्ती में भाग ले सकते है ! 
ज्ञांत हो की यूथ फाउंडेशन द्वारा कर्नल अजय कोठियाल के मार्गदर्शन में टिहरी के प्रतापनगर ब्लॉक के जीआईसी, ओखलाखाल में भर्ती मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस चयन कैम्प की तारीख 16.07.2018 है। जिसका समय प्रातः 7 बजे से है। इस भर्ती प्रक्रिया में सिर्फ प्रतापनगर ब्लॉक के युवा युवतियां ही हिस्सा ले सकते है Iक्षेत्रीय युवाओं युवतियों को इस अवसर का फायदा उठाना चाहिए ! आर्मी में जाने के इच्छुक युवा/युवती अधिक से अधिक कैंप मैं पहुँच कर, अपने भविष्य को स्वर्णिम बनाये। इस कैम्प में 3 माह का मुफ्त प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। जिसका पूरा ख़र्च कर्नल अजय कोठियाल द्वारा संचालित यूथ फाउंडेशन द्वारा निर्वाहन किया जाता है। उल्लेखनीय हो की अब तक 
कर्नल अजय कोठियाल द्वारा आयोजित इन कैंपो से 7500 युवाओं का आर्मी मैं चयन हो चुका है।

Wednesday, July 4, 2018

समन्वय और समपर्ण की प्रतिमूर्ती बड़ेथी स्कूल

समन्वय और समपर्ण की प्रतिमूर्ती बड़ेथी स्कूल

*प्रेम पंचोली*

एक ऐसा विद्यालय जहां अध्ययनरत् बच्चे ना कोई ट्यूशन पढते हैं और ना ही कोई अतिरिक्त फीस भरते हैं। पर बच्चो का अध्ययन का स्तर उच्चस्तरीय है। यह इस मायने में की वहां अध्यापन कार्य से जुड़े शिक्षक ही हैं जो बच्चों को हर स्तर पर तरासने का काम करते है। शिक्षको का आपसी समन्वय ही बताता है कि क्यों न कोई अभिभावक अपने पाल्यों को उत्तरकाशी के बड़ेथी गांव स्थित राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय में दाखिला करवायें। आास-पास के गांवो से दूर-दूर तक इस विद्यालय की गूंज सुनाई दे रही है। यहां प्राथमिक स्तर पर बच्चे कम्पयूटर के अलावा गणित, विज्ञान को खेल-खेल के माध्यम से सीखते है। कह सकते हैं कि सरकारी स्तर पर यह पहला विद्यालय होगा जहां ‘‘लरनिंग बाय डूईंग’’ जैसे पद्वत्ति का उपयोग हो रहा है और रट्टू जैसी प्रवृति से ये बच्चे छुटकारा पा चुके हैं।



समर वेकेशन से पहले मुझे भी इस विद्यालय में बच्चो के साथ मुखातिब होने का मौका मिला। मौका था बच्चो के साथ थियेटर कार्यशाला का। जिसमें बच्चो की ‘‘दक्षता विकास’’ पर गतिविधियां करनी थी, वह भी खेल खेल में। वैसे भी हम कोशिश करते हैं कि बच्चो को रटने  वाली प्रक्रिया से बाहर निकाला जाये। सलेबस को सरल और आकर्षण बनाया जाये। ऐसा ही हुआ, और बच्चो के साथ पांच दिन तक सीखने व सिखाने का दौर चला। जिसका नाम दिया गया ‘‘सृजनात्मक लेखन कार्यशाला’’। आरम्भ में ही बच्चों में बहुत उत्साह, विश्वास से ओतप्रोत, जिज्ञासा और सीखने की ललक, सवाल करने की क्षमता दिखाई दी। इस सब के लिए बच्चे ही बता रहे थे कि उन्हे यह विद्या उनके शिक्षक सीखाते हैं। पहले व दूसरे दिन तक बच्चो ने कहानी, कविता, गीत लिखने की सामान्य जानकारी सीखने का प्रयास किया। यही नहीं बच्चो ने पिछले दिनों की गतिविधियों को भी समाचार आधारित प्रक्रिया द्वारा प्रस्तुत किया। इसी प्रकार बच्चों ने डायलॉग डिलेवरी, डिक्सन, कल्पनाशीलता और शब्द संयोजन सहित हमिंग, एकाग्रता जैसी विधाओ की बारीकियों को सीखने का भरसक प्रयास किया।


बता दें कि ‘‘हैलो जिंदगी’’ कार्यक्रम के तत्वाधान में राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय बड़ेथी उत्तरकाशी के छात्र-छात्राओ के साथ यह पांच दिवसीय ‘‘सृजनात्मक लेखन कार्यशाला’’ आयोजित हुई। हैलो जिंदगी कार्यक्रम की संयोजिका अशिता डोभाल का कहना है कि उत्साह से लबरेज ये बच्चे और पांच दिनों में मिले टिप्स ने उनकी सृजनशीलता दुगुना कर दिया है। बच्चों का प्रदर्शन बता रहा है कि इस कार्यशाला से इनमें नई ऊर्जा का संचार हुआ है। इधर इस आदर्श विद्यालय की उपलब्धि इन बच्चो का विश्वाश बताता है। यही नही विद्यालय में शिक्षकों का समन्वय भी यह दर्शाता है कि इन अध्यनरत छात्र-छात्राओं में पढ़ने की जो ललक पैदा हुई है। तारिफकाबिल यह कि बच्चो में यह जिज्ञासा व आत्मविश्वाश प्रधानाध्यापक संजय कुकसाल, अंग्रेजी की अध्यापिका मीना भट्ट, ईवीएस के मुरारी राणा, हिंदी की शुशीला राणा, विज्ञान की बिंदु पडियार, गणित के डॉ’ मुकेश नौटियाल ने कूट-कूटकर भरी है। इसके अलावा भोजन माता अंजू एवं बीना देवी के संयुक्त प्रयास भी बच्चो को परोसा जा रहा भोजन यानी मध्यांतर भोजन भी उनके अध्ययन कार्य में कोई व्यवधान नहीं डाल रहा है। फलस्वरूप इसके विद्यालय में हर सत्र के दौरान छात्र संख्या में वृद्धि होना भी आदर्श विद्यालय को प्रमाणित करता है। कार्यशाला के समापन अवसर पर मौजूद रहे राजकीय इण्टरमीडिएट काॅलेज बड़ेथी के प्रधानाचार्य बीएस भण्डारी ने कहा कि रा0आ0प्रा0वि0 बड़ेथी बच्चों को हर स्तर का मंच उपलब्ध करवा रहा है। कहा कि बिना बजट के जैसे किसी बड़े प्राइवेट विधालय के छात्रों को हर विभाग में प्रतिस्पर्धा देने का हूनर बताया जाता है वैसे ही इस विद्यालय के बच्चे हर स्तर पर प्रतिस्पर्धा में भाग लेते है। वह तब जब इस विद्यालय में ऐसे हर संभव सृजनात्मक माहौल बनाया जाता है। उन्होंने अध्यापक-अध्यापिकाओं की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिक्षको के निर्देशन में ये फूल अब फुलवारी का रूप ले रहे हैं जिसकी सुगंध दूर-दूर तक मसहूस की जायेगी।

दक्षता विकास कार्यशाला


कुल तीस बच्चों ने इस कार्यशाला में भाग लिया है। इस दौरान बच्चों ने लिखना, बोलना, सुनना व सुनाना, गायन, जैसी विद्या से कविता का सृजन करना, कहानी का सृजन करना, लघुनाटक आदि क्षमताओं का प्रदर्शन किया। बच्चों की कल्पनाशक्ति का विकास, अध्ययन के सरल तरीको जैसे आयाम इजाद हुए है। बच्चों ने माना कि ‘‘रटू’’ जैसी प्रक्रिया पठन-पाठन में पिछड़ने का काम करती है। इसलिए वे ‘‘लरनिंग बाय डूईंग’’ प्रक्रिया को सहज ही स्वीकारते हैं जो कि बच्चों ने अलग-अलग दिनों में अपने-अपने प्रस्तुतिकरण में बताया।

प्रधानाध्यापक संजय कुकसाल 


राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय बड़ेथी में बच्चों के प्रवेश हेतु उन्होंने शोसल मीडिया का खूब इस्तेमाल किया है। वे अपील कर रहे हैं कि उनके विद्यालय में कम्प्यूटर का ज्ञान। सरल व नई विद्या से पठन पाठन का कार्य, बच्चों की क्षमता विकास के लिए शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले विद्वानो से बच्चो को मुखतिब करवाना, विषयगत सामग्री के अलावा बच्चों को उनके मुताबिक सामान्य ज्ञान से जोड़ना। लिहाजा उनके विद्यालय का फायदा लोग अपने पाल्यों के पक्ष में उठाये। यह सकारात्मक ऊर्जा इस विद्यालय में हर संभव दिखाई देती है। वे अपनी पोष्ट पर बाकायदा विद्यालय के आस-पास के गांव बड़ेथी, धरासू, धनपुर, नागनी, फेडी, दिकोलि, नालूपानी के ग्रामिणों को आह्वान करते हैं।

विद्यालय की विशेषता 


राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय बड़ेथी में तैनात शिक्षिका श्रीमती सुशीला रावत हिन्दी भाषा की जानकर है। वे बच्चे के मनोविज्ञान को पढ़कर उसे भाषा में दक्ष बनाती है। मुरारी राणा सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ अध्यापक हैं, वे अपने अध्यापन का विषय समाज और आसपास की घटनाओं को बनाते हैं, इसके नीमित वे बच्चों को देश व दुनियां से मुखतिब करवाते हैं। डॉ0 मुकेश नौटियाल गणितज्ञ हैं, वे बच्चों को सरल भाषा में गणित पढाते हैं। उनका पठन-पाठन का तरीका भी बडा रोचक है। वे गणित को रोजमर्रा की चीजों से जोड़ते हैं। इसी को माध्यम बनाकर गणित को वे रोचक विषय बना देते हैं। श्रीमती मीना भट्ट अंग्रेजी भाषाविद् हैं। मौजूदा हालात के साथ चलने वाली यानि आधुनिक अंग्रेजी भाषा की जानकर हैं। बोलचाल में अग्रेजी कैसे सरल रूप से बोले। उन्होंने बच्चों के साथ खेल खेल में अग्रेजी सिखाने का नया तरीका इजाद किया हुआ है। श्रीमती बिंदु गुंसाई पडियार भी विज्ञान और क्राफ्ट को कैसे खेल खेल में सीखे और कबाड़ को दैनिक जीवन में कैसे सदुपयोग करें और विद्यालय एवं घर को कैसे सजाएं जैसे विषय की पूर्ण विशेषज्ञ हैं। यही वजह है कि इस विद्यालय के बच्चों की कुशलता आईना की तरह साफ दिखाई दे रही है। हालांकि बड़ेथी (उत्तरकाशी) का यह सरकारी प्राथमिक विद्यालय है। यहां कमोबेश लड़के और लड़कियों की संख्या समान है। लड़के और लड़कियां का एक साथ मिलकर बैठना ही अच्छा संकेत माना जाता है।
-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------

A school where studious children do not read any tuition or fill any extra fees. But the level of studies of children is high level. This is in the sense that there are teachers associated with teaching work, who work to make the children look at every level.



Kamal joshi day oh

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1698313590204392&id=100000773032861
A news kamal joshi

समुदाय को गाली। समुदाय में रोष व्याप्त। लोक कलाकरो ने भी इस गीत की भर्त्सना की है।

यह व्यक्ति जिनका नाम लोग मनोज सागर बता रहे है। वे यहां जो गीत गा रहे है यह व्यक्ति ढोली समुदाय को बहुत अभद्र गाली दे रहे है। मनोज सागर नाम क...