Monday, March 19, 2018

365 दिन की सरकार! क्या? सचमुच में है बेकार


परेडग्राउण्ड में हुए सरकार का एक साल है बेमिसाल को लेकर ऐसा लोग कहते फिरते हैं  कि  इस साल में हुए लोग बेहाल। खैर उत्तराखण्ड में भारी बहुमत से सत्ता में आई भाजपानीत सरकार का एक साल पूरा हो गया है। इस दौरान परेडग्राउण्ड में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एक वर्ष का लेखा-जोखा एक भव्य आयोजन के मार्फत भाजपा के कार्यकर्ताओ और मीडिया के सम्मुख प्रस्तुत किया है। इन विकासीय योजनाओ की जमीनी हकीकत कैसी होगी वह तो यथा स्थान पर पंहुचकर ही बताया जा सकता है। पर मुख्यमंत्री ने जो बखान किया है वह तारीफेकाबिले इस मायने में कि बहुत ही सटीक आंकड़े व लुभावनी बाते ‘‘एक साल बेमिसाल’’ कार्यक्रम में लोगो को कम से कम सुनने को तो मिली है।

अस्थाई राजधानी देहरादून के परेडग्राराउण्ड में हुए ‘‘एक साल बेमिसाल’’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाने का संकल्प दोहराया है। उन्होंने भ्रष्टाचार को मिटाने में जनता से भी सहयोग की अपेक्षा की है। प्रदेश में पिछले एक वर्ष में संस्थागत भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया गया है। यह भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में भ्रष्टाचारियों में दहशत ही नहीं बल्कि भ्रष्टाचारी, भ्रष्ट तरीके से कमाये गये धन को वापस करने की बात कर रहे है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कैंसर रोगियों और हृदय रोगियों के लिये एक माह  के भीतर माॅडल लैब स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि एक वर्ष के भीतर प्रदेश की सड़कों के सभी दुर्घटना सम्भावित क्षेत्र (ब्लैक स्पाॅट) ठीक कर दिए जाएंगे। अपै्रल माह तक 108 सेवा की 111 अतिरिक्त एम्बुलेंस आ जाएंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद्य सामग्री की जांच के लिये मोबाईल फूड टेस्टिंग लैब की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। और उन्होंने इन सचल वाहनों को भी झंडी दिखाकर रवाना किया।

प्रदेश सरकार के एक वर्ष पूर्ण होने पर परेड ग्राउण्ड में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अपनी सरकार के एक वर्ष पूर्ण होने पर जनता के समक्ष राज्य सरकार के गुड गवर्नेंस माॅडल को प्रस्तुत किया। लगभग 20 मिनट के सम्बोधन में मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही करने की बात दृढ़ता के साथ दोहराई। उन्होंने ग्राम्य विकास, महिला सशक्तिकरण, चिकित्सा, स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था, सूचना प्रौद्योगिकी, जल संरक्षण, विद्युतीकरण, शिक्षा, स्वच्छता, समाज कल्याण जैसे सभी महत्वपूर्ण सैक्टरों में पिछले एक वर्ष में किये गए कार्यों की जानकारी दी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास के अपने विजन को भी साझा किया। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा उत्तराखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में बाल लिंगानुपात पर किये गये अध्ययन को जारी किया है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा जनता से उत्तराखण्ड को विकसित पारदर्शी व भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाने का वायदा किया गया था। उसके परिणाम भी सामने है। 05 वर्षों की तुलना में प्रदेश में इस एक वर्ष की अवधि में अपराध, हत्या, मृत्यु की घटनाओं में कमी आयी है। पुलिस द्वारा अपराधों के नियन्त्रण में प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। कम्पलशिव करप्शन दूर करने के लिये अपराधों की विवेचना एवं अन्य आवश्यक कार्यों के लिय पुलिस को अलग से विशेष फण्ड दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आर्थिक अनुशासन मितव्ययता व सुशासन के बल पर वे नया उत्तराखण्ड बनायेंगे। पलायन राज्य में बड़ी समस्या है। इसके लिये गठित पलायन आयोग ने सभी गांवों का सर्वे किया गया है। उसकी रिपोर्ट 15 अप्रैल को आयेगी। स्वास्थ, शिक्षा, सड़क, बिजली, पर्यटन, कृषि, बागवानी, सहकारिता स्वरोजगार से सम्बन्धित योजनाओं की पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों तक सुनिश्चित हो इसके लिये प्रभावी पहल की गई है। जोर देकर कहा कि प्रदेश की सभी नगरपालिकाओं व नगर निकायों को भी खुले में शौच से मुक्ति मिल गई है। इस प्रकार आज उत्तराखण्ड पूर्ण रूप से ओडीएफ होने वाला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान समय पर हो, राज्य सरकार के कार्यों में तेजी व पारदर्शिता दिखाई दे, इसके लिये सीएम डेशबोर्ड बायोमेट्रिक, समाधान पोर्टल, सेवा का अधिकार के तहत लगभग सभी जन उपयोगी सेवाओं को जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक अनुशासन का प्रतिफल है कि  आज ऊर्जा विभाग द्वारा 180 करोड़, परिवहन विभाग द्वारा 150 करोड़ रूपये तथा खनन के क्षेत्र में 28 प्रतिशत की वृद्धि राजस्व में हुई है। प्रदेश में किसानों के हित में 02 प्रतिशत ब्याज पर ऋण दिया जा रहा है। इस दौरान केन्द्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा, सांसद मजर जनरल(से.नि.) भूवनचन्द्र खण्डूड़ी, पूर्व मुख्ष्मंत्री भगत सिंह कोश्यारी, संासद मालाराज्य लक्ष्मी शाह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने अपने-अपने सम्बोधन में कहा कि प्रदेश सरकार का एक वर्ष के कार्यकाल बहुत ही सराहनीय रहा है।

फार्म मशीनरी बैंक और अन्य विकासीय योजनाऐं लोगो के सुपूर्द

कृषि विभाग द्वारा फार्म मशीनरी बैंक जनपद पौड़ी गढ़वाल से अध्यक्ष बलवन्त सिंह, जय ढौंडियाल देवता यंत्रीकरण व जनपद टिहरी से अध्यक्ष गोविन्द सिंह राणा दोगी उत्पादक स्वायत्त सहकारी समिति को फार्म मशीनरी बैंक हेतु चैक प्रदान किया गया। पं0 दीनदयाल उपाध्याय किसान कल्याण योजना के अन्तर्गत दुग्ध व्यवसाय हेतु लाभार्थियों को 1-1 लाख रूपये का ऋण प्रदान किया गया। इस योजना के तहत चुड़ियाला बहु0 सहकारी समिति लि0 के जयपाल व इन्द्र को दुधारू पशुओं के लिए 1-1 लाख रूपये के चैक प्रदान किए गए। इसके साथ ही हर्बटपुर बहु0 सहकारी समिति लि0 से दुग्ध व्यवसाय हेतु प्रमोद कुमार व श्रीमती सुनीता को भी 1-1 लाख रूपये के चैक वितरित किए गए। गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करने के लिए राज्य के स्कूलों को माॅडल स्कूलों के रूप में विकास किया जा रहा है, जिसके तहत स्कूलों को स्मार्ट क्लास के रूप में विकसित किया जाएगा। योजना के अन्तर्गत मुख्यमंत्री द्वारा रा.इ.का. बागेश्वर व रा.इ.का. देवाल, चमोली गढ़वाल के प्रधानाचार्यों को के-यान प्रोजेक्टर प्रदान किए गए। ‘‘उज्ज्वला‘‘ योजना के तहत श्रीमती जमना देवी व श्रीमती पार्वती देवी को निशुल्क गैस कनेक्शन प्रदान किया गया।

राज्य में उद्योगों के विकास एवं युवाओं के लिए रोजगार उत्पन्न करने के उद्देश्य से स्टैण्डअप योजना शुरू की गयी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह द्वारा स्टैण्डअप योजना के अन्तर्गत श्रीमती गगनदीप कौर को 40 लाख रूपये व सुश्री बबीता को 11 लाख रूपये का ऋण पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर कार्यक्रम में 369 चिकित्सकों की नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। मंच पर ही मुख्यमंत्री ने डाॅ. शुभंकर प्रतीक लाल, डाॅ. सोनम सिंह, डाॅ. रितिका चैहान, डाॅ. नीतू विश्वकर्मा व डाॅ.अभिषेक आर्या को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। उन्होंने कार्यक्रम के उपरान्त सभी नवनियुक्त डाॅक्टरों से मुलाकात की और उनके साथ ग्रुप फोटो भी खिंचवाई। इस दौरान आशा कार्यकत्रियों के लिये वर्ष 2012 से रूकी हुई 33 करोड रूपये की प्रोत्साहन राशि जारी की गयी। कार्यक्रम के दौरान सांकेतिक रूप से जनपद देहरादून की ललितेश विश्वकर्मा (डोईवाला), बीना नौटियाल (रायपुर), गंगा भण्डारी (सहसपुर), संध्या कुंवर (विकासनगर), सुनीता (कालसी) व शालू (चकराता) को आशा प्रोत्साहन राशि के चैक प्रदान किए गए। तीन जनपदों से आई आशा कार्यकत्रियों को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार दिए गए है। प्रथम पुरस्कार के अन्तर्गत रोशनी राणा (देहरादून), पुष्पा (हरिद्वार) व लक्ष्मी (टिहरी) को पंाच-पांच रूपये प्रदान किए गए। द्वितीय पुरस्कार के अन्तर्गत शीला चैहान (देहरादून), मुमताज(हरिद्वार) व दर्वा देवी(टिहरी) को 3000 रूपये प्रदान किए गए इसी प्रकार तृतीय पुरस्कार के रूप में मुनेश कुमारी (देहरादून), अमृता (हरिद्वार) व बबली (टिहरी) को 1000 रूपये प्रदान किए गए। कार्यक्रम में लगभग 2500 आशा कार्यकत्रियों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने दुग्ध संघों को प्रोत्साहित करने हेतु छिद्दरवाला दुग्ध समिति व हरचन्दपुर दुग्ध समिति, दुग्ध मूल्य प्रोत्साहन राशि के चैक वितरित किए। इसके साथ ही, सेलवाणी दुग्ध समिति को सचिव प्रोत्साहन राशि के अन्तर्गत चैक वितरित किए गए। कार्यक्रम में दुग्ध संघों के लगभग 5000 प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

स्वच्छता के क्षेत्र में राज्य के सभी निकाय ओ.डी.एफ. घोषित किए जा चुके हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में उत्कृष्ट कार्य के लिये अध्यक्षा, नगर पंचायत हरबर्टपुर, श्रीमती बीना शर्मा, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद मसूरी मनमोहन मल्ल एवं महापौर, नगर निगम रूद्रपुर, श्रीमती सोनी कोली को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में आए नगर निकायों के अध्यक्षों के साथ मुख्यमंत्री ने मुलाकात कर उन्हें बधाई भी दी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा ‘‘ई-रिक्शा’’ योजना के अन्तर्गत देहरादून की श्रीमती गीता कौर एवं किशोरी को ई-रिक्शा प्रदान किया। ‘‘सौभाग्य‘‘ योजना के अन्तर्गत श्रीमती कुन्ती देवी व शम्भु प्रसाद सेठ को सौभाग्य बिजली कनेक्शन दिये गये। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रकाश पन्त, मदन कौशिक, अरिवन्द पाण्डेय, सुबोध उनियाल, यशपाल आर्य, राज्यमंत्री धनसिंह रावत, श्रीमती रेखा आर्या, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी सहित विधायकगण, जनप्रतिनिधि एवं शासन, प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Thursday, March 15, 2018

मैनफेस्ट- दून बिजनेस स्कूल में रंगारंग कार्यक्रम




मैनेजमेन्ट कॉलेज दून बिजनेस स्कूल में तीन दिवसीय ‘मैनफैस्ट’ 2018 का शानदार आगाज हुआ। तीन दिन तक चलने वाले इस आयोजन में उत्तराखंड एवं देश के विभिन्न हिस्सों से 60 से ज्यादा कॉलेज भाग लेंगें। ज्ञातव्य हो कि विद्यार्थियों के चौमुखी विकास के लिए प्रतिबद्ध समारोह पिछले 10 सालों से हर साल डीबीएस में आयोजित किया जाता है। 

प्रथम दिन के समारोह का शुभारम्भ कालेज के चेयरमेन मोहित अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया । इस अवसर पर मोहित अग्रवाल ने उपस्थित अतिथिगणों तथा सभी कॉलेजों के विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मैनफेस्ट जैसे कार्यक्रम छात्रों के लिए उत्साहवर्धक होते है जिनसे उन्हें भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करने की सीख मिलती है। इसके बाद छात्रों को सम्बोन्धित करते हुए कॉलेज के निदेशक डा. ब्रह्म प्रकाश पेठिया ने कहा कि मैनफेस्ट जैसे आयोजन का उद्देश्य सभी विद्यार्थियों को एक ऐसा मंच प्रदान करना है, जहां पर वे अपनी क्षमता को परख सके और अपने व्यक्तिव को निखार सके। इससे विधार्थियों मे आत्म विश्वास बढ़ता है और वे भविष्य में अनेको उपलब्धियां हासिल कर पाते हैं।
मैनफेस्ट के पहले दिन डेविल्स एड्वोकेट, ग्रॅाफीटी, मैड एड, वार आफ बैंड्स, फॅशन शो, इंवेर्टीक्स, बिज क्विज, डांस  और गायन जैसे अनेक कार्यक्रम और प्रतियोगिताओ का आयोजन किया गया। इन प्रतिर्स्पधाओं के चलते सभी प्रतिभागियों में उत्साह देखने को मिला। छात्र-छात्राओं ने अपने-अपने ज्ञान एवं अनुभव के आधार पर अनेक प्रतियोगिताओं मे हिस्सा लिया। पूरे दिन के कार्यक्रमो के चलते छात्रों ने जहाँ सुबह के चरण मे हुई खेल स्पर्धाओं मे बढ़ चढ़कर भाग लिया वही पहले दिन की शाम गीतों और नृत्य का आयेजन किया, जिसमें छात्रों ने भी जमकर कदम थिरकाए।

आज के मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहे बैण्ड परफॉरमेन्स में विभिन्न कॉलेजों के बैण्डों ने हिस्सा लिया जिसका लुत्फ उपस्थित सभी शिक्षकों और विधार्थियों ने जमकर उठाया। अन्तिम प्रतियोगिता फैशन शो थी जिसमें मेजबान दून बिजनेस स्कूल के साथ अन्य कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने भी रैंम्प पर अपना जलवा बिखेरा। सभी टीमों का प्रर्दशन काबिले तारीफ रहा जिसके चलते समारोह तालियों की गूँज से भर गया ।

समारोह के दूसरे दिन इस कार्यक्रम में देश भर से आये हुए 60 से ज्यादा कॉलेज शिरकत करेंगे। गौरतलब है कि समारोह के दूसरे दिन वाईएलपी वुमनिया बैंड एवं तीसरे दिन बॉलीवुड की जानीमानी पार्श्व गायिका गुलाबो फेम अनुषा मानी अपनी सुरीली आवाज से आगाज करेगी। इस दौरान डीबीएस का प्रांगण छात्रों से भरा हुआ रहा। इस कार्यक्रम की सारी गतिविधियाँँ दून बिजनेस स्कूल के विद्यार्थियों की देखरेख में सम्पन्न हुई। 

इस दौरान दून बिजनेस स्कूल के संस्थापक एस0 के0 अग्रवाल,, चैयरमैन मोहित अग्रवाल, सस्ंथान निदेशक डा0 ब्रह्म प्रकाश पेठिया, प्रिंसपल डा0 एम सी पोरवाल, डा0 सुनील चौधरी, डा0 ज्ञानेन्द्र पाण्डे ,ललित कुमार, नवज्योति सिॅंह नेगी, आदि लोग मौजूद थे।

Tuesday, March 13, 2018

प्रकृति की मल्लिका मुनस्यारी के सरमोली गांव में



एक ऐसा सरमोली नाम का गांव जहां की जन्नत लोगो को यू ही अपने ओर आकृषित करती है कि यहां एक रात ठहरिए और बदले में ले जाईऐ सुकून एवं पर्यावरण की शिक्षा। पर्यावरण की शिक्षा, जो कोई बोझिल नहीं। प्रकृति के बीच आपकी जिम्मेदारी, आपका रहन-सहन मौजूदा वक्त में कैसा हो, ऐसा सरमोली गांव में सबकुछ देखने व सीखने को मिल जाता है। साफ-सुथरे रास्ते, व्यवस्थित की हुई पानी की नालियां, पुराने पानी के जलधारे जो यूं ही बरबस सुर-सरिता की आवाज देते हुए बहते दिखाई देंगे। कुलमिलाकर इस गांव में जल, जंगल, जमीन का संरक्षण भी है तो उसका उपयोग पर्यटन के रूप में रोजगार का साधन भी ग्रामीणो के लिए बन चुका है। अब तो सरमोली गांव के लोग यूं कहते फिरते हैं कि पानी का संरक्षण करो, वृक्ष लगाओ, जमीन पर परंपरागत खेती को बढावा दो। क्योंकर की यह सब उनकी आजीविका के साधन जो बन गये है।
ज्ञात हो कि यह सब करके दिखाया पंजाब से एक दशक पूर्व यहां घूमने आई मल्लीकाविर्दी ने। वे घूमने तो आई पर यही की रैवासी हो गई। इसी तरह केरल से थियो नाम का शख्स भी यहां घूमने आया। वह भी यहीं का बसेरा कर बैठा। हुआ यूं की दोनो की मुलाकात एक दूसरे से पर्यटक के रूप में हुई। यह मुलाकात आगे चलकर पर्यावरण संरक्षण की कसम खाते हुए संसारिक जीवन में बदल गयी। पिथौरागढ में मुनस्यारी के पास यहीं सरमोली गांव को दोनो ने साथ रहने के लिए चुना। बस फिर इन दोनो की कहानी आगे बढती है पर्यावरण जागरूकता से। जिस तरह से दोनो एक दूसरे से जुड़ गये उसी तरह इन्होंने ग्रामीणो को पानी, पेड़ व जमीन से जुड़ने की वापसी करवाई। बता दें हैं कि ग्लोबलाईजेशन के दौर में लोगो का अपने पर्यावरण के प्रति मोहभंग होता जा रहा है। लोगो को लगता है कि बहुतायात में जो उनके पास प्राकृतिक संसाधन हैं वह उनके विकास में अवरोधक है। वे बतातें हैं कि मौजूदा समय में जो भी विकास की योजनाऐं बन रही है वे लोगो को प्रकृति से दूर करने वाली साबित हो रही है। उन्होंने फिर से ग्रामीणो के विश्वास को जागृत किया, और आज सरमोली गांव पर्यावरण-प्रकृति के साथ-साथ पर्यटन विकास का अद्भुत उदाहरण है।
यह कटु सत्य है कि पहाड़ का पर्यावरण संवारने का बीड़ा पंजाब की बेटी व केरल की बहू मल्लिका विर्दी ने उठा रखा है। उनका मनोरंजन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी अनूठा प्रयास रंग ला रहा है। उनकी इस मुहिम से ग्रामीणों की जंगल के प्रति अपनत्व बढ़ने लगा है। नतीजा यह हुआ की, क्षेत्र में वृक्षविहीन हो चुके कुछ स्थल अब घने जंगल में तब्दील हो गए हैं। फलस्वरूप इसके मुनस्यारी में पिछले एक दशक में पर्यटकों की आवाजाही खासी बढ़ी है। मुनस्यारी से सटे सरमोली गांव इस बात का उदाहरण है कि जहां पानी, पेड़ और जमीन रूखसत हो चुकी थी आज वहां की प्राकृतिक सुन्दरता लोगो को फिर से पुकार रही है कि ‘‘आ अब लौट के जा’’। क्षेत्र में लोग इसका श्रेय मल्लीकाविर्दी को देते हैं।
उल्लेखनीय हो कि मल्लीकाविर्दी व थियो का विवाह इस बात का प्रमाण है कि उन्होने हर पल प्रकृति के दोहन और संरक्षण को लोगो के साथ मिलकर आवश्यकता के अनुरूप किया। नतिजा यह हुआ कि यह लोगो का स्वरोजगार का भी जरिया बनता गया। सह तब संभव हो पाया जब थियो के साथ शादी के बाद मल्लिका ने मुनस्यारी में ही घर बसा लिया। तब से वह लोगों को जल, जंगल के प्रति जागरूक कर रही हैं। उन्होंने यहां के लोगों को होम स्टे के प्रति भी प्रेरित किया। आज यहां सौ से अधिक लोग होम स्टे के माध्यम से आत्मनिर्भर बन चुके हैं। होम स्टे पर्यटकों से गुलजार रहते हैं। इसकी परिणति यह हुई कि सरमोली के ग्रामीणों ने भी अपनी बेटी की तरह मल्लिका को स्वीकार किया। यही नहीं उन्होंने मल्लिका को 2007 में गांव का सरपंच भी चुना। यहीं से शुरू हुई मल्लिका विर्दी की दूसरी पारी।  उन्होंने जंगल, वन्य जीव व पक्षियों के संरक्षण के लिए वन कौथिग (जंगल मेला ) शुरू  किया, जिसका पिछले 11 साल से मई में नियमित रूप से आयोजन होता आ रहा है। हर वर्ष कौथिग में विषय भी बदल जाते हैं और त्यौहार भी। कभी पक्षी त्यौहार तो कभी स्थानीय खानपान विषय होते हैं। यहां पर्यावरण के विषय को लोक प्रदर्शन के साथ जोड़कर उसे आकर्षक बनाया जाता है। पिछले वर्ष तितलियों के संरक्षण के लिए तितली त्यौहार मनाया गया था। पिथौरागढ की तीन ग्राम पंचायतों के लगभग दस गांवों के लोग ‘‘वन कौथिग’’ मनाते हैं। इस दौरान ग्रामीण खालर पड़ी वनभूमि पर पौधे भी रोपते हैं।


ऐसे मिली प्रेरणा

सरपंच रहने के दौरान जब जंगल में श्रमदान का काम चल रहा था उसी वक्त मल्लिका के मन में वन कौथिग के विचार ने जन्म लिया। इसके तहत मल्लिका ने ग्रामीणों से वार्ता कर प्रतिवर्ष वन कौथिग मनाने का निर्णय लिया। एक दशक से सरमोली गांव में वन कौथिग की ऐसी धूम रहती है कि अब लोग स्वतः ही एक माह पूर्व से ही इस मेले की तैयारियों में जुट जाते हैं।


ऐसे जुड़ते हैं लोग

सरमोली गांव में प्रकृति की जन्नत है। प्रकृति के बीच आपकी जिम्मेदारी, आपका रहन-सहन मौजूदा वक्त में कैसा हो, ऐसा सरमोली गांव में सबकुछ देखने व सीखने को मिल जाता है। साफ-सुथरे रास्ते, व्यवस्थित की हुई पानी की नालियां, पुराने पानी के जलधारे बरबस बहते दिखाई देते हैं। इस गांव में जल, जंगल, जमीन का संरक्षण भी है तो उसका उपयोग पर्यटन के रूप में रोजगार का साधन भी बन चुका है। यहां मनोरंजन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी मिलता है। वर्तमान में क्षेत्र में वृक्षविहीन हो चुके कुछ स्थल अब घने जंगल में तब्दील हो गए हैं। मल्लीकाविर्दी व थियो का विवाह इस बात का प्रमाण है कि उन्होने हर पल प्रकृति के दोहन और संरक्षण को लोगो के साथ मिलकर आवश्यकता के अनुरूप किया। लोग यहां होम स्टे का कारोबार भी कर रहे हैं तो ‘‘वन कौथिग’’ का आयोजन भी करते हैं। इस कौथिग में जंगल, वन्य जीव व पक्षियों के संरक्षण कर रणनीति बनाई जाती है। हर वर्ष कौथिग में विषय भी बदल जाते हैं और त्यौहार भी। कभी पक्षी त्यौहार तो कभी स्थानीय खानपान विषय होते हैं। पिछले वर्ष तितलियों के संरक्षण के लिए तितली त्यौहार मनाया गया था। पिथौरागढ की तीन ग्राम पंचायतों के लगभग दस गांवों के लोग ‘‘वन कौथिग’’ मनाते हैं।

Thursday, March 8, 2018

माईक्रो डेयरी उद्यमी है बजलाड़ी की पाटमादेवी

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मै अपने क्षेत्र की दो महिला उद्यमी पर एक छोटा सा  आलेख लिख रहा हूँ | इनकी जैसी हमारी रंवाई घाटी में सैकड़ो अन्य और भी महिलाये हैं | इस अवसर पर ऐसी कर्मशील महिलाओ को सलाम |









माईक्रो डेयरी उद्यमी है बजलाड़ी की पाटमादेवी


पाटमा देवी राणा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के दूरस्थ क्षेत्र बजलाड़ीगांव की ऐसी पशुपालक और किसान महिला है जिसने अपने इस व्यवसाय को रोजगार से जोड़ा है। वह आज यह सुनिश्चित कर सकती है कि उसके बच्चों को पर्याप्त कैल्शियम से परिपूर्ण आहार दिया जा रहा है। कुछ वर्ष पहले उनके घर में दूध की समस्या खड़ी हो गयी थी, उसे सुझा कि पशु और कृषि का तो चोली दामन का साथ है। इसलिए पाटमा देवी समस्या की जड़ तक पंहुची और अपने गांव में महिलाओं के एक समूह का आयोजन किया। एक डेयरी पहल की शुरुआत की जिसने न केवल अपने बच्चों और दूसरों के स्वास्थ्य में सुधार किया है बल्कि महिलाओं को अपनी जिंदगी बढ़ाने के लिए पर्याप्त आय पैदा करने की शक्ति भी दी है। वे और उनका समूह इन दिनों राज्य में एक प्रमुख दूध आपूर्ति कंपनी अंचल डेयरी के सदस्य बन चुके हैं। कहती है कि उन्होंने इस कार्य को हिमालयी एक्शन रिसर्च सेंटर की मदद से आगे बढाया है। पाटमा देवी के नेतृत्व में चार गांवों की कुल 40 महिलाएं इस काम से जुड़ चुकी है। बजलाड़ी, पामाड़ी, नारयूंका और मानड़गांव की महिलायें अब डेयरी उत्पादन के कार्य को सुचारू रूप से कर रही है और अच्छी आमदानी भी कर रही है।

पाटमा बताती है कि उन्होंने स्थानीय बैंक से ऋण लिया। शुरू में बैंक ने उन्हें मात्र 15,000 रुपये का एक परीक्षण ऋण दिया था, इस शर्त पर कि अगर वे निर्धारित राशि के भीतर इस रकम का भुगतान करते हैं, तो उन्हें भविष्य में अधिक ऋण दिया जाएगा। उन्होने 15 माह में इस ऋण को चुकता कर दिया। इसके पश्चात समूह की आठ सदस्यों ने ऋण लिया और प्रत्येक ने पूरी ऋण राशि से एक गाय खरीदी। उन्होंने जनवरी 2011 में एक और ऋण लिया। जिसके मार्फत समूह की प्रत्येक महिला ने एक गाय खरीदी। पाटमा देवी की पहली गाय ने एक दिन में आठ किलो दूध दिया था। इसमें से तीन किलो दूध उसके परिवार के उपयोग में लाया गया। बाकि आंचल डेयरी को बेच दिया गया। इसी समूह से जुड़ी श्रद्धादेवी और अन्य 40 महिलायें खुशी-खुशी डेयरी उद्यमी बन चुकी हैं। डेयरी किसान आमा देवी अपने पांच बच्चों के साथ खुश है कि वे बच्चो को पौष्टिक आहार भी दे रही है और आमदानी भी कर रही है। वे अपने मुनाफे का एक हिस्सा अपने गाय को कृत्रिम रूप से पदेमउपदंजमक पाने के लिए इस्तेमाल करती है।

माटी से संघर्ष और माटी से रोजगार


खान्सी गांव के स्व॰ जीवा लाल और स्व॰ पिंगला देवी के घर जन्मी राजकुमारी अपने भाई बहनों में दूसरे नम्बर की बहन है। उसके पीछे एक भाई और एक बहन है। राजकुमारी की शादी कोई 15-16 वर्ष की उम्र में पास के मुराड़ी गांव में हो गयी। तब राजकुमारी को घर-गृहस्थी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उस वक्त राजकुमारी को ससुराल व माईके आना-जाना गोया घुमना ही लगता था। वक्त के थपेड़े राजकुमारी को बता रहे थे कि शादी का मतलब घर-गृहस्थी को सम्भालना, संवारना और जिम्मेदारी को निभाना भी होता है। यही नहीं खुद भी रोजगार कमाना होता है। राजकुमारी भी और महिलाओं की भांती अपने ससुराल के इस परिवार में अपनी दिनचर्या से जुड़ गयी। बस वह तो कम उम्र में ब्याह दे गयी थी, स्कूल भी तब उसके नसीब नहीं हुई परन्तु राजकुमारी का काम ही तो है, जो मौजूदा समय में एक मिशाल बनकर उभर रही है।
मुराड़ी गांव के मदन लाल को राजकुमारी से ब्याह रचना ही खुशनसीब हुआ। मदन लाल भी अपने भाई से जुदा होकर एक बारगी चिन्ता में पड़ गया। परन्तु उनके पास तो धरती की बेटी राजकुमारी जो है। दोनो ने एक दूजे का साथ देते हुए कृषि को अपना रोजगार बनाया। अब राजकुमारी के निर्देशन में धरती को सरसब्ज करने का बीड़ा उठाया गया। जबकि उसे मालूम नहीं था कि वह गांव के गायत्री समूह से जुड़ने के बाद कृषि-स्वावलम्बन की दिशा में उतरोत्तर कार्य कर पायेगी।

राजकुमारी ने 14 वर्ष पूर्व अपने आास-पास के लोगो की जमीन को किराया में लिया और नगदी फसल की ओर कदम रखा। वे डर-डर के कृषि के काम मे हाथ अजमाने लगी। क्योंकि उन्हे यह मालूम था कि कृषि काम में नफा नही नुकसान ही है। पर ऐसा हुआ नहीं क्योंकि राजकुमारी मेहनती है। आज वे सालाना 90 से एक लाख रूपय की आमदानी सिर्फ खेती से करती है। जबकि वे 12 हजार रू॰ से भी अधिक का किराया अन्य खेतो का प्रत्येक वर्ष चुकाती है। तभी तो राजकुमारी के किराये के खेतों में मूली, राई, खीरा, मटर, टमाटर की स्वस्थ फसल तैयार हो रही है। यही नहीं वह दूध का भी कारोबार करती है। मौजूदा समय में राजकुमारी क्षेत्र में एक प्रगतिशील किसान के रूप में स्थापित हो चुकी है। वह अब लगातार खुद और अपने आस-पास के लोगो को किसानी के लिए प्रेरित कर रही है। राजकुमारी जितनी अच्छी एक किसान है उससे अधिक वह कृषि कार्यो की प्रशिक्षक भी है। राजकुमारी महिला उत्पादों के समक्ष एक अनुकरणीय उदाहरण है।

Saturday, March 3, 2018

गजब: किराया क डोखर-पुंगण, अर आमदानी लाखों


अर बल् नौनू जरूरी छा, किलै की कुल चलौण क वास्त! पर अज्यूं तलक जू बी काम बिगड़ी ग्यान् वी सबि कू जिम्मवार भी नौनू छा। क्वाई नौनीयों न् कुल पर दाग लगौण क वास्ता यनू गलत काम कैरी नि भै। अब देखा साहब! देश-दुन्या म नौनियू न बड़ू-बड़ू काम कैरी कैन बिज्या नौ कमाई छ। यख भी उत्तरकाशी की जमुना घाटी क मुरारी गौं की राजकुमारी कू काम भी कै बड़ू काम सी कम नि च। ब्यौ का बाद राजकुमारी क सामणी पर ई समस्या खड़ी ह्वैग्यान की जीविका चलौण क खातिर अग्नै वै न क्या काम करणू छाइ। किलै की अपु मुंग वै की डोखरी-पुंगणी नौं मात्र की चा। पर वै हिम्मत नि हारी अर् वै न गौं मां लोकार बांज डोखर-पुगण कट्ठ कैरी कैन, खेती कू काम शुरू कैरी दिनी। अर् वै सी अपणी जीविका बणै दिनी।
देखा साहब! मुरारी गौं क सामणी पर यानि जमुना छाल त्वरी कैन खान्सी गौं च। वख बटि राजकुमारी कू ब्यौ मुरारी गौं क मदन लाल क दगड़ी जब ह्वाई, त ई दुई झण वै बक्त बिल्कुल बेरोजगार छाई। पर राजकुमारी न मैत बटि सी लेकर सौर तलक खूब संघर्ष कैरी। वै न बतै दिनी कि नौनी भी कै सी कम नी चा। हे भगवान राजकुमारी कहानी भिण्डी विपदाभरी चा। बतै दियून् की खान्सी गौं क स्व॰ जीवा लाल अर् स्व॰ पिंगला देवी क घौर राजकुमारी कू जनम ह्वाई। वी अपण भाई बैणियूं मां दूसर नम्बर क बैण च। वै क पिछनै एक भाई अर् एक बैण च। राजकुमारी कू ब्यौ मिजाणी 15-16 बरस क छोटी उम्र मां मुराड़ी गौं मा ह्वैग्यान्। या बोली सकदन कि राजकमारी स्कूल भी जै नि सकी। वनी उम्र मां राजकुमारी घौर-गृहस्थी क बार मां क्या जाणदी छा। वै दिनू त राजकुमारी सी ससुराल व मैत कू आणू-जाणू ही घुमण कू काम लगणू च।

पर समय की झंझावत वै थै बतौणी चा कि ब्यौ कू मतलब छा की घौर-गृहस्थी कू काम-धाम क दगड़ी-दगड़ी जीविका चलौण क खातिर भी तौं दुई झण कुछ करणू पौड़्लू। यनि छोटी उम्र मां राजकुमारी भी गौं क औरू कजाणी जनी अपण ससुराल मां रमी ग्याई। किलै की वै कू त छोटी उम्र मा ब्वौ ह्वैग्यान्। स्कूल भी वी क मुकदर मा नि ह्वाई। पर आजब्यालु राजकुमारी कू काम जमुनाघाटी मां एक मिशाल बणी कैन सामणी पर एै गैनी। अजी भैजी! मुराड़ी गौं क मदन लाल खुशनसीब चा की वै कू ब्यौ राजकुमारी क दगड़ी जू ह्वै।
अब मदन लाल भी अपण भाई-बन्धौ सी जुदा ह्वैग्या। एक बार त वी भिण्डी मायूस ह्वै गैन की वै मुंग कोई रोजगार कू काम-धन्धा नि च। पर वै न सोची कि वै क दगड़ी त धरती की बेटी राजकुमारी छा। कोई बात की फिकर नि च भै। दुई झणू न एक हैंक साथ देण कू वादा कैरी अर् खेती-किसानी क काम मां हाथ अग्नै बढै दिनी। अर इुई झणू न बोली कि अब त धरती मां सी ही रोजगार पौल। राजकुमारी मुरारी गौं मां गायत्री स्वयं सहायता समूह क दगड़ी जुड़ी ग्या। वी न समूह क मार्फत जू कृषि-स्वावलम्बन कू प्रशिक्षण लिनी वे क्रियान्वयन क खातिर वी न खेती-किसाणी सणी रोजगार कू साधन बणै दिनी।

राजकुमारी न आज सी 15 बरस पैली अपण गौं मां लोकार डोखर-पुंगण किराय पर लिनी। अर वी डोखर-पुंगण पर वैन् नगदी फसल कू काम शरू कैरी दिनी। पर वै सणी भिण्डी बेरी डौर सतौणू चा कि डोखर-पुंगण कू काम जू छा घाट कू काम छा। पर वै या बात सी कतई हारी नि। किलै की वी मेहनती राजकुमारी छा भै। अब त मौजू बक्त राजकुमारी किराय क डोखर-पुंगणू सणि नगदी फसल सी सालाना 90 सी एक लाख रूप्या की आमदानी करणी छाई। या क बाद भी वी जू छा 12 हजार रूप्या डोखर-पुंगण कू किराया भी चुकाणी छा। अजी हां, अब त राजकुमारी क किराय क डोखर-पुंगण मूली, राई, खीरा, मटर, टमाटर की स्वस्थ फसल पैदा कनी चा। या क दगड़ी-दगड़ी राजकुमारी दूध कू काम भी करणी चा। कुल मिलै की ईं कू कृषि व पशुपालन कू काम एक मिशाल बणी ग्यान्। इलै कि जमुनाघाटी मां राजकुमारी न् एक प्रगतिशील किसान क रूप मा अपणी पैचान बणै दिनी।
वी अपु अर अपण आस-पास कू लोकू सणी खेती कू काम रोजगार बणौण क वास्त प्रेरित कनी चा। बतै द्यून की राजकुमारी जतक अच्छी किसान छा वै क दगड़ी वी एक कृषि कामू की प्रशिक्षक भी छा। या क वास्ता राजकुमारी एक उदाहरण चा की लगन अर मेहनत सफलता की सीढी चा।

समुदाय को गाली। समुदाय में रोष व्याप्त। लोक कलाकरो ने भी इस गीत की भर्त्सना की है।

यह व्यक्ति जिनका नाम लोग मनोज सागर बता रहे है। वे यहां जो गीत गा रहे है यह व्यक्ति ढोली समुदाय को बहुत अभद्र गाली दे रहे है। मनोज सागर नाम क...