सत्य भाई, ये तूने क्या किया। थोड़ा भी कुछ सोचने और समझने का मौका नही दिया। मैं तो सोच रहा था कि आप अब लंबी छुटी आएंगे तो बचपन की यादें साझा करेंगे। सत्य भाई हम सबके साथ ये अच्छा सलूक नही है। अब तो आंसुओ की बूंदे भी जबाब दे रही है। कह रही है कि सत्य है जिसने अपने सहयोगियों के साथ रहकर देश की सीमाओं पर पहरा दिया। SSB के तेरे साथी और बचपन के स्कूली साथी आज अपने को समझा नही पा रहे है कि कुदरत ने हमारे साथ ऐसा बेहूदा व्यवहार क्यो किया। है, ईश्वर हमने ऐसा कभी नही सोचा कि तू इतना बेईमान होगा और बिना बताए सत्य भाई को हमसे छीन लेगा। सलाम सत्य भाई, देश के लोग और शरहद आपकी यादे कैसे भूल सकती है। पर भगवान नाम के हे अदृश्य शक्ति ये तेरा छलावपन ठीक नही है, जो तूने हमसे सत्य को छीनकर खुद असत्य के पथ पर आ गया। अब लोग तुझ जैसे भगवान पर भरोसा नहीं करेंगे। क्योंकि तूने यह अच्छा नही किया।
सत्य भाई मुझे अच्छी तरह याद है कि साल 1994-95 की बात है। हम नौगांव इंटर कालेज के छात्र थे, तू और बिंगसी का अर्जुन, छमरोटा का कुंदन (गुडू) एक ही दिन व एक ही साथ घर से भागकर निकले थे, यहाँ चर्चा का माहौल गरम था। खैर कुछ दिन बाद खबर आई कि सत्य तो SSB में निकल गया, अर्जुन घर आ गया और कुंदन ड्राइवर बन रहा है। बस साल, महीने, दिन गुजरते गए हम सभी सगे साथी अपने अपने कामो में मशगूल हो गए। तू छुटी आता था तो हम लोग कहीं न कहीं मिल ही लेते थे। अब हम इंतजारी ही करते रहेंगे। अचानक हमसे व परिवार से ऐसा बिछुड़ना निशब्द व बेआंसू कर रहा है। इतना गुमान है कि तेरा बलिदान देश के खातिर हुआ है। मगर दोस्ती का यह जख्म शायद कभी भर जाय।