झगड़े की अंह, नुकसान जनता का
By - Prem Pancholi
यमुना घाटी के रवाई पत्रकार संगठन और अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी उत्तरकाशी के बीच पिछले 4 महीनों से तनातनी बढ़ी हुई है। रवांई घाटी पत्रकार संगठन ने अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी उत्तरकाशी के विरोध मोर्चा खोल दिया है। जबकि इधर अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी उत्तरकाशी पर अब तक किसी भी प्रकार के आरोप सामने नहीं आए है। स्वयं जिलाधिकारी उत्तरकाशी एक बात से अनविज्ञ हैं कि अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी उत्तरकाशी और रवाई पत्रकार संगठन के मध्य क्यों टकराहट बढ़ी है। उनके अनुसार अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी कार्य के प्रति समर्पित अधिकारी है।
दरअसल अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी पर रवाई घाटी पत्रकार संगठन ने जो आपत्ती या अनियमितताएं की खबर प्रस्तुत की है उसकी अब तक कोई भी प्रामाणिकता सामने नहीं आ पाई है। जबकि इस अहम के झगड़े की जानकारी महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी से लेकर मुख्यमंत्री तक की टेबल तक है। इधर अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी उत्तरकाशी के समर्थन में उत्तरकाशी अनुसूचित जाति संगठन एवम् उत्तराखंड समता अभियान ने एक पत्र मुख्यमंत्री को प्रेषित किया है।
अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी उत्तरकाशी सुरेश कुमार ने इस संवादाता को दूरभाष पर बताया कि वे नियमित जिले के सभी पत्रकारों को सूचनाएं पहुंचाते हैं। जो उनकी विभागीय जिम्मेदारी भी है। इस मामले को लेकर जब जिले के मुख्यधारा के वरिष्ठ पत्रकारों से जानकारी मंगीं गई तो वे भी इस झगड़े से इत्तेफाक नहीं रखते। इस झगड़े में यहां इस बात का जिक्र किया जा रहा है कि रवाई घाटी पत्रकार संगठन से जुड़े कुछ पत्रकार और जिला अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी उत्तरकाशी के बीच की लड़ाई बेबुनियादी रूप से आगे बढ़ी है। बताया जा रहा है कि यह लड़ाई इसलिए भी आगे बढ़ी कि अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी कभी सूचना मुख्यालय उत्तरकाशी में एक सामान्य सहायक के पद पर तैनात थे, जब से उनकी पदोन्नति हुई तब से जिले के कुछ पत्रकारों और अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी के बीच टकराहटा बढ़ी है। मामला जो भी है इस टकराहट के कारण जिले में हो रहे विकास के कार्यों की सूचना आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है, जिसका खामियाजा उत्तरकाशी जिले के तमाम ग्रामीण भुगत रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि आभासी दुनिया के मंच पर जब यह खबर प्रसारित हुई तो अलग अलग प्रतिक्रिया सामने आई। यहां तक कि एक प्रतिक्रिया में बताया गया कि एक पत्रकार के निजी अखबार के अनियमित होने पर जिले से विज्ञापन छपने बन्द हो हुए, तो पत्रकार ने अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। यह बात कितनी सच है जो जांच का विषय है। अपुष्ट सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि निजि स्वार्थों की पूर्ति के लिए पत्रकारों के संगठनो का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है।
कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों का कहना है कि अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी सुरेश कुमार की जांच विभाग कर सकता है, वैसे भी अमुक अधिकारी के पास कोई वितीय पावर नही है। जबकि कतिपय पत्रकार जो पत्रकारिता की आड़ में कई अवैध व्यवसाय कर रहे है उनकी जांच कौन करेगा? यही अहम सवाल खड़ा हो गया है। इधर रंवाई घाटी पत्रकार संगठन का मानना है कि कौन ऐसा पत्रकार है जो अवैध व्यवसाय से जुड़ा है। उनका नाम भी उजागर होना चाहिए। दिलचस्प यही होगा कि इस झगड़े के करण सरकार ऐसे संगठनों व पत्रकारों की भी जांच अवश्य करवाए ताकि अधकचारी जानकारी से आम जनता को बचाया जा सके।
नाम न छपवाने बावत कुछ लोगो का कहना है कि पत्रकारिता के नाम पर अधिकारियों एवं विभागों से भत्ता वसूली की जाती है। कभी अहम का सवाल खड़ा किया जाता है। कभी अहवेलना का मसला सामने आता है। मगर इन झगड़े वाले पत्रकारों ने कभी ऐसी खबर प्रसारित नहीं कि की विकासीय योजनाएं आम लोगो तक किस रूप में पहुंचाई जा रही है। लोगो का यह भी कहना है कि चाहे वह खबर फाइल कापी में छप जाए तो भी गनीमत है। फिर भी इस तरह के अखबार मालिक सूचना अधिकारी से लेकर उच्च अधिकारीयो तक अखबार को नियमित करने का दबाव बनाते है। यदि ऐसा है तो यह भी सबसे बड़ा भष्ट्राचार होगा।


















