Saturday, July 15, 2023

झगड़े की अंह, नुकसान जनता का

झगड़े की अंह, नुकसान जनता का

By - Prem Pancholi 


यमुना घाटी के रवाई पत्रकार संगठन और अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी उत्तरकाशी के बीच पिछले 4 महीनों से तनातनी बढ़ी हुई है। रवांई घाटी पत्रकार संगठन ने अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी उत्तरकाशी के विरोध मोर्चा खोल दिया है। जबकि इधर अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी उत्तरकाशी पर अब तक किसी भी प्रकार के आरोप सामने नहीं आए है। स्वयं जिलाधिकारी उत्तरकाशी एक बात से अनविज्ञ हैं कि अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी उत्तरकाशी और रवाई पत्रकार संगठन के मध्य क्यों टकराहट बढ़ी है। उनके अनुसार अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी कार्य के प्रति समर्पित अधिकारी है।


दरअसल अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी पर रवाई घाटी पत्रकार संगठन ने जो आपत्ती या अनियमितताएं की खबर प्रस्तुत की है उसकी अब तक कोई भी प्रामाणिकता सामने नहीं आ पाई है। जबकि इस अहम के झगड़े की जानकारी महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी से लेकर मुख्यमंत्री तक की टेबल तक है। इधर अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी उत्तरकाशी के समर्थन में उत्तरकाशी अनुसूचित जाति संगठन एवम् उत्तराखंड समता अभियान ने एक पत्र मुख्यमंत्री को प्रेषित किया है।

अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी उत्तरकाशी सुरेश कुमार ने इस संवादाता को दूरभाष पर बताया कि वे नियमित जिले के सभी पत्रकारों को सूचनाएं पहुंचाते हैं। जो उनकी विभागीय जिम्मेदारी भी है। इस मामले को लेकर जब जिले के मुख्यधारा के वरिष्ठ पत्रकारों से जानकारी मंगीं गई तो वे भी इस झगड़े से इत्तेफाक नहीं रखते। इस झगड़े में यहां इस बात का जिक्र किया जा रहा है कि रवाई घाटी पत्रकार संगठन से जुड़े कुछ पत्रकार और जिला अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी उत्तरकाशी के बीच की लड़ाई बेबुनियादी रूप से आगे बढ़ी है। बताया जा रहा है कि यह लड़ाई इसलिए भी आगे बढ़ी कि अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी कभी सूचना मुख्यालय उत्तरकाशी में एक सामान्य सहायक के पद पर तैनात थे, जब से उनकी पदोन्नति हुई तब से जिले के कुछ पत्रकारों और अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी के बीच टकराहटा बढ़ी है। मामला जो भी है इस टकराहट के कारण जिले में हो रहे विकास के कार्यों की सूचना आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है, जिसका खामियाजा उत्तरकाशी जिले के तमाम ग्रामीण भुगत रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि आभासी दुनिया के मंच पर जब यह खबर प्रसारित हुई तो अलग अलग प्रतिक्रिया सामने आई। यहां तक कि एक प्रतिक्रिया में बताया गया कि एक पत्रकार के निजी अखबार के अनियमित होने पर जिले से विज्ञापन छपने बन्द हो हुए, तो पत्रकार ने अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। यह बात कितनी सच है जो जांच का विषय है। अपुष्ट सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि निजि स्वार्थों की पूर्ति के लिए पत्रकारों के संगठनो का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है।

कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों का कहना है कि अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी सुरेश कुमार की जांच विभाग कर सकता है, वैसे भी अमुक अधिकारी के पास कोई वितीय पावर नही है। जबकि कतिपय पत्रकार जो पत्रकारिता की आड़ में कई अवैध व्यवसाय कर रहे है उनकी जांच कौन करेगा? यही अहम सवाल खड़ा हो गया है। इधर रंवाई घाटी पत्रकार संगठन का मानना है कि कौन ऐसा पत्रकार है जो अवैध व्यवसाय से जुड़ा है। उनका नाम भी उजागर होना चाहिए। दिलचस्प यही होगा कि इस झगड़े के करण सरकार ऐसे संगठनों व पत्रकारों की भी जांच अवश्य करवाए ताकि अधकचारी जानकारी से आम जनता को बचाया जा सके।

नाम न छपवाने बावत कुछ लोगो का कहना है कि पत्रकारिता के नाम पर अधिकारियों एवं विभागों से भत्ता वसूली की जाती है। कभी अहम का सवाल खड़ा किया जाता है। कभी अहवेलना का मसला सामने आता है। मगर इन झगड़े वाले पत्रकारों ने कभी ऐसी खबर प्रसारित नहीं कि की विकासीय योजनाएं आम लोगो तक किस रूप में पहुंचाई जा रही है। लोगो का यह भी कहना है कि चाहे वह खबर फाइल कापी में छप जाए तो भी गनीमत है। फिर भी इस तरह के अखबार मालिक सूचना अधिकारी से लेकर उच्च अधिकारीयो तक अखबार को नियमित करने का दबाव बनाते है। यदि ऐसा है तो यह भी सबसे बड़ा भष्ट्राचार होगा।











Friday, July 14, 2023

मिशन चंद्रयान-3 का आज सफल प्रक्षेपण

मिशन चंद्रयान-3 का आज सफल प्रक्षेपण 



श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण कर दिया गया है इसके साथ ही भारत इतिहास रचने को तैयार है। इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण हेतु पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने उम्मीद जताई है सब कुछ सही रहा तो आगामी 23 अगस्त को चंद्रयान 3 चंद्रमा पर उतरेगा।

लैंडर विक्रम को किया गया और मजबूत
चंद्रयान-3 को आज दोपहर 2:35 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया। चंद्रयान-3 में चंद्रयान-2 के मुकाबले काफी कुछ बदलाव किया गया है। लैंडर विक्रम के पैरों को ज्‍यादा मजबूत किया गया है। नए सेंसर लगाए गए हैं। सोलर पैनल से उसे लैस किया गया है। एक सबसे बड़ा बदलाव जो हुआ है वह है लैंडिंग एरिया का बढ़ाया जाना।वहीं एक दिन पहले इसरो ने बताया कि एमआरआर बोर्ड ने प्रक्षेपण को अधिकृत कर दिया है। इसरो ने प्रक्षेपित किए जाने वाले चंद्रयान-3 मिशन के लिए संपूर्ण प्रक्षेपण तैयारी और प्रक्रिया का 24 घंटे का प्रक्षेपण पूर्वाभ्यास किया। मिशन को प्रक्षेपण यान मार्क 3 (एलवीएम3) से प्रक्षेपित किया जाना है। इस पूरे मिशन का खर्च 615 करोड़ है।

भारत का अब तक का चंद्रयान सफर
चंद्रयान-1
भारत का पहला चंद्रयान मिशन 22 अक्टूबर 2008 को को लॉन्च किया गया था। इसमें एक ऑर्बिटर और एक इम्‍पैक्‍टर चांद की ओर भेजा गया था। 8 नवंबर 2008 को चांद की कक्षा में पहुंचा। यह मिशन दो साल के लिए था। चंद्रयान-1 ने चांद की सतह पर पानी के संकेत खोजे।

चंद्रयान-2
20 अगस्त 2019 को चंद्रयान-2 को चांद की कक्षा में पहुंचाया गया। 7 सितम्बर को विक्रम लैंडर को चांद पर फाइनल लैंडिंग होनी थी लेकिन चांद की सतह से कुछ दूरी पर ही इसका ISRO से संपर्क टूट गया। हालांकि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर अभी भी चांद की कक्षा में अपना काम कर रहा है।

चंद्रयान-3
चंद्रयान-3 मिशन चंद्रयान-2 का ही अगला चरण है, जो चंद्रमा की सतह पर उतरेगा और परीक्षण करेगा। 14 जुलाई को भारत अपना चंद्रयान-3 लॉन्च कर रहा है। यह मिशन इसरो के चंद्रयान-2 मिशन का फॉलोअप मिशन है। चंद्रयान-3 में इस बार ऑर्बिटर नहीं जा रहा है, केवल एक लैंडर और रोवर जा रहा है। 23 या 24 अगस्त को यह चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश करेगा। यह मिशन भारत को अमेरिका, रूस और चीन के बाद चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का चौथा देश बना देगा।

Chandrayaan-3 

Tuesday, July 11, 2023

स्वयं के व्यवहार में लाना होगा कि हम पॉलिथीन का कदापि प्रयोग नहीं करेंगे, प्लास्टिक कचरे से दिन प्रतिदिन जलवायु परिवर्तन

 Sakshi Pancholi


पॉलिथीन यानी प्लास्टिक से बना एक जार यह एक ऐसा पदार्थ है जिसके कारण जल मृदा और वायु तीनों प्रकार के प्रदूषण फैलते हैं।साथ ही यह मानव जीवन के लिए भी हानिकारक है। अगर प्लास्टिक का उपयोग इसी तरह बढ़ता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब प्लास्टिक की वजह से मानव सभ्यता का नामो निशान ही मिट जाएगा।


हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्लास्टिक उन्मूलन कार्यक्रम की शुरुआत की है। प्लास्टिक हटाओ, पर्यावरण बचाओ अभियान 2019 का आगाज ऐतिहासिक रिज मैदान से किया गया था। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने 12 सौ प्रतिभागियों को शिमला के रिज मैदान से 14 अलग-अलग जगहों के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्लास्टिक का प्रयोग न करने की शपथ दिलाई, पर्यावरण के प्रति जागरूकता में वृद्धि के साथ यह स्पष्ट किया है कि हम एक स्थाई समाज बनाने के लिए और अधिक कुछ कर सकते हैं। अगर हम में से हर एक छोटे छोटे कदम उठाएं और कुछ अलग विकल्पों की सहायता लें तो निश्चित रूप से दुनिया की मूल सुंदरता और संसाधन को बहाल करने का रास्ता निकल आएगा।


दरअसल प्रकृति और मानव ईश्वर की अनमोल एवं अनुपम कृति है। प्रकृति अनादिकाल से मानव की सहकारी रही है। लेकिन मानव ने अपने भौतिक सुखों वह इच्छाओं की पूर्ति के लिए इसके साथ निरंतर खिलवाड़ किया है और वर्तमान समय में यह अपनी सारी सीमाओं को पार कर चुका है। स्वार्थी एवं उपभोक्तावादी मानव ने प्रकृति यानी पर्यावरण को पॉलिथीन के अधाधुंध प्रयोग से जिस तरह प्रदूषित किया है वह करता ही जा रहा है। इस कारण संपूर्ण वातावरण पूरी तरह आहत हो चुका है।

आज के भौतिक युग में पॉलिथीन के दूरगामी दुष्परिणाम एवं विषैले प्रदूषण से लेकर हमारा समाज इसके उपयोग में इस कदर आगे बढ़ गया है मानो इसके बिना उनकी जिंदगी अधूरी है।


हालांकि प्लास्टिक निर्मित वस्तुएं गरीब एवं मध्यवर्गीय लोगों का जीवन स्तर सुधारने में सहायक है, लेकिन वहीं उसके लगातार उपयोग से वह अपनी मौत के बुलावे से भी अनभिज्ञ हैं। यह एक ऐसी वस्तु बन चुकी है जो घर में पूजा स्थल से लेकर रसोईघर, कमरे तक के उपयोग में आने लगी है।

यही नहीं अगर हम बाजार से कोई भी वस्तु जैसे राशन, फल, सब्जी, कपड़े आदि यहां तक कि तरल पदार्थ जैसे दूध, दही, तेल इत्यादि भी लाना हो तो उसको लाने में प्लास्टिक का ही प्रयोग होता है। आज मनुष्य पॉलिथीन का इतना आदि हो चुका है कि वह कपड़े या जूट के बने थैलों का प्रयोग करना ही भूल गया है। आज के युग में दुकानदार भी हर प्रकार के पॉलिथीन बैग रखने लग गए हैं। क्योंकि ग्राहक ने उसे पॉलिथीन रखने को बाध्य कर दिया है।

मानव समाज को पॉलिथीन से होने वाले प्रदूषण के बचाव के लिए बढ़-चढ़कर आगे आना होगा और अपने अपने स्तर पर इससे निपटने के लिए सहभागी होना होगा। चाहे बच्चे हो या बूढे, स्त्री हो या पुरुष सभी को इससे निजात पाने के लिए सहृदय कार्य करना होगा।

परिवार के बड़े सदस्य स्वयं पॉलिथीन का प्रयोग ना करें, साथ ही दूसरे सदस्यों को भी इसका प्रयोग करने से रोक, आसपास के लोगों को भी इसका प्रयोग करने से रोकें और इसके विषय में इसके दुष्परिणाम की जानकारी दें तो यह सबसे बड़ा कदम होगा। यदि बाजार खरीदारी करने जाएं तो अपने साथ जूट या कपड़े से निर्मित थैले को ही लेकर जाएं। यदि दुकानदार पॉलिथीन में सामान दे तो उसको भी इसका प्रयोग करने से रोकें। पॉलिथीन का बहिष्कार करें। यदि उपभोक्ता ही इसका भोग करना बंद कर दें तो इसकी जरूरत दिन प्रतिदिन कम होती चली जाएगी और एक समय ऐसा भी आएगा जब पॉलिथीन का पूरे वातावरण से सफाया हो जाएगा।


"आओ मिलकर बच्चन ले
पॉलिथीन को मरना है
वातावरण को स्वच्छ बनाना है"

प्लास्टिक इस समय का प्रमुख प्रदूषक है, एक गैर विघटित पदार्थ होने तथा जहरीले रसायन से बना होने के कारण यह पृथ्वी, हवा और पानी को प्रदूषित करता है। पॉलिथीन अपने उत्पादन और निपटान डिस्पोजल के कारण पर्यावरण की गंभीर क्षति का कारण बनता जा रहा है। पॉलिथीन के खतरों को कम करने का तरीका तो केवल प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और इसके उत्पादन में कटौती करने से ही संभव है। पॉलिथीन, पॉलिविनाइल, क्लोराइड पॉलिस्टर बड़े पैमाने पर प्लास्टिक के निर्माण में प्रयोग किया जाता है। सिंथेटिक ऑलईयर आसानी से जटिल आकार में ढल जाते हैं। जो उच्च रासायनिक प्रतिरोधक हैं और अधिक या कम लोचदार होते हैं। कुछ को फाइबर या पतली पारदर्शी फिल्मों में भी बदला जा सकता है। इन्हीं गुणों के कारण उन्हें कई लोकप्रिय टिकाऊ या डिस्पोजेबल वस्तुओं और पैकेजिंग सामग्री बनाने के लिए उपयोग में लाया जाता है। इन सामग्रियों का आणविक भार यानी एक थैली पर कई हजारों से लेकर 150000 तक होता है। अत्यधिक आणविक आकार होने के कारण इन रसायनों की प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है और यह लंबे समय के लिए मिट्टी के वातावरण में अपने आप को बनाए रखते हैं। प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए एक गंभीर संकट बना हुआ है। हर परिवार हर साल करीब 3 से 4 किलो प्लास्टिक थैलों का इस्तेमाल करता है। बाद में यही प्लास्टिक के थैले कूड़े के रूप में पर्यावरण के लिए मुसीबत बनते हैं।

पिछले साल देश में 2900000 टन प्लास्टिक कचरा था जिसमें से करीब 1500000 टन कचरा सिर्फ प्लास्टिक का ही था। एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरे संसार में प्रतिवर्ष 100 मिलीयन टन से भी ज्यादा प्लास्टिक का उत्पादन होता है। देश में हर साल 30 से 40 लाख टन प्लास्टिक का उत्पादन किया जाता है। इसमें से करीब आधा यानी 20 लाख लाख टन प्लास्टिक रीसाइकलिंग के लिए पाया जाता है। हालांकि हर साल करीब साढे सात लाख टन कूड़े की रीसाइक्लिंग की जाती है। जबकि रीसाइक्लिंग को उद्योग का दर्जा हासिल है और सालाना करीब 25 अरब रुपए का कारोबार है। देश में प्लास्टिक का कार्य करने व साइकिलिंग करने वाली छोटी बड़ी 20000 इकाइयां हैं।

जहां भी मानव ने अपने कदम रखे वही पॉलिथीन प्रदूषण को फैलाया है। यही हिमालय की घाटियों को भी प्रदूषित कर रहा है। यह इस स्तर तक बढ़ गया है कि सरकार भी इसके रोकथाम के लिए प्रचार कर रही है। पिकनिक सैर सपाटे सभी स्थान भी इस से पीड़ित है। हिमालय पर लगभग 11,000 ग्लेशियर है जिनके कारण वे दुनिया की सबसे बड़ी पानी की मीनार कहलाई जाती है। इनमें से ज्यादा तर ग्लेशियर पिघल रहे हैं। अनुमान है कि हिंदुओं का प्रमुख गोमुख ग्लेशियर 2035 तक समाप्त हो जाएगा। बाकी अन्य ग्लेशियर जो हर साल पीछे खिसकनें की कगार पर आ चुके है। कारण इसके हर साल 10 से 12 मीटर तक भूमिगत पानी का स्तर घटता ही जा रहा है। पॉलिथीन प्रदूषण इतनी मात्रा में बढ़ चुका है कि सरकार भी इसके निवारण के लिए अभियान पर अभियान चला रही है।

सैर सपाटे वाली सभी स्थान पॉलिथीन से ग्रस्त हैं। भारत में लगभग 10 से 15000 इकाइयां पॉलिथीन का निर्माण कर रही है सन 1990 के आंकड़ों के अनुसार हमारे देश में इसकी खपत 20000 टन थी जो अब बढ़कर 3 से 4 लाख टन तक पहुंचने की सूचना है। जो कि भविष्य के लिए खतरे का सूचक है। हम सरकारी तंत्र से भी यही आग्रह करना चाहेंगे कि पॉलिथीन का कम से कम प्रयोग करें और पॉलिथीन बनाने वाली इकाइयों को कम करें। इस प्रकार प्रकृति की गरिमा बनी रहेगी और जीव, जंतु तथा पेड़ पौधे स्वस्थ एवं प्रदूषण मुक्त रहेंगे।

जलवायु परिवर्तन के खतरो को करने बावत जिलाधिकारी को एक एकीकृत प्रस्ताव

 जलवायु परिवर्तन के खतरो को करने बावत जिलाधिकारी को एक एकीकृत प्रस्ताव


Prem Pancholi


डालियों का दगड़िया सामाजिक संस्थान ने टिहरी जनपद के जिला अधिकारी से मिलकर प्रताप नगर एवम् जाखणीधार ब्लॉक के 15 गांव में जलवायु परिवर्तन को लेकर ग्राम सभा से प्राप्त प्रस्ताव को प्रस्तुत किया है।

संस्था से जुड़े कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी टिहरी मयूर दीक्षित को बताया कि प्रतापनगर और जाखणीधार ब्लॉक यानी उनके कार्य क्षेत्र के 15 गांव में कृषि, भूमि संरक्षण, उद्यान, अन्य कृषि विकास के कार्य, सिंचाई, खेलकूद, युवा कल्याण विकास आदि की मांग गांव के लोगों की प्रमुख है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के प्रस्ताव में अंकित है कि वह स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार की दिशा में काम करना चाहते हैं। डालियों का दगड्या संस्था के कार्यकर्ताओं ने जिला अधिकारी को अलग-अलग गांव से मिले प्रस्ताव का एक संपूर्ण विकास योजना का दस्तावेज प्रस्तुत किया है। इस प्रस्ताव में बताया गया कि कुछ गांव के लोग उद्यानीकरण करना चाहते हैं। ताकि एक तरफ वहां जंगल सुरक्षा का काम हो और दूसरी तरफ लोगों को फल उत्पादन से स्वरोजगार प्राप्त हो सके। कुछ ग्रामीणों ने वृक्षारोपण की बात की है और अधिकांश ग्रामीणों ने सिंचाई, घेर-बाढ़, युवा कल्याण विकास कार्य जैसे खेलकूद आदि सामग्री और साथ-साथ रास्ते और महिला उद्यमिता के लिए विभिन्न प्रकार के स्वरोजगार संबंधी प्रस्ताव जिला अधिकारी को प्रस्तुत किया है। 

जिलाधिकारी ने बताया कि वह शीघ्र ही तमाम गांव का भ्रमण करेंगे और इन प्रस्ताव का अध्ययन कर जल्दी ही तमाम गांव में इन कार्यक्रमों को क्रियान्वयन करवाने का प्रयास करेंगे। संस्था से जुड़े कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया और उन्हें कार्यक्षेत्र में आने का आमंत्रण दिया है।
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डालियों का दगड्या संस्था के प्रबंध निदेशक डा० मोहन पंवार ने बताया कि संस्था जाखणीधार ब्लॉक के 13 और प्रतापनगर ब्लॉक के 02 गांव उनके परियोजना क्षेत्र के हैं। इस कार्यक्रम के लिए संस्था को TDH/BMZ जर्मनी की एक संस्था सहयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि वे इन गांवों में सरकारी और गैर सरकारी विकासीय योजनाओं के साथ समन्वय बनाना चाहते है। ताकि आम लोगो तक विकास के कार्य पहुंच पाए। उन्होंने यह भी बताया कि वे गांव स्तर पर जलवायु परिवर्तन के खतरो को कम करने के लिए युवाओं, बच्चो और महिलाओ के समूहों के साथ पानी, पेड़ व भूमि के सरंक्षण के साथ साथ पर्यवारणीय स्वरोजगार के रचनात्मक कार्य कर रहे है। ताकि भविष्य में जलवायु परिवर्तन के खतरो को कम किया जा सके। इसके लिए भी सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय की आवश्यकता है।

समुदाय को गाली। समुदाय में रोष व्याप्त। लोक कलाकरो ने भी इस गीत की भर्त्सना की है।

यह व्यक्ति जिनका नाम लोग मनोज सागर बता रहे है। वे यहां जो गीत गा रहे है यह व्यक्ति ढोली समुदाय को बहुत अभद्र गाली दे रहे है। मनोज सागर नाम क...