मामला-ए-शिक्षिका: निलम्बन, गिरफ्तार और डैमेज कंट्रोल
प्रेम पंचोली
हालांकि शिक्षिका उतरा पन्त बहुगुणा ने मुख्यमंत्री के दरबार में जाकर हंगामा किया। पर हंगामा करने का इरादा क्या था। प्रश्न इस बात का है कि जब उक्त शिक्षिका अपनी बात को रख रही थी उसी वक्त मुख्यमंत्री के दरबार में पुकार लगाने वाले व्यक्ति ने एक ऐसे व्यक्ति का नाम पुकारा जो भाजपा के बहुत ही नामी गिरामी व्यक्ति हैं। इस पुकार में शिक्षिका को लगा कि उसकी आवाज कहीं दब सी गई है। क्योंकि जिस जनपद के गांव में शिक्षिका तैनात है उसी क्षेत्र से भाजपा के उस व्यक्ति का नाम मुख्यमंत्री के दरबार में पूकारा गया। अच्छा होता कि भाजपा का वह शख्श उतरा पन्त बहुगुणा के समर्थन में बात रखता कि पहले उक्त शिक्षिका को सुना जाये। बजाय वह शख्श अपने आवेदन को आगे खिसकाने लगा। इसी दौरान मुख्यमंत्री और शिक्षिका दोनो आग बबूल हो गये।उल्लेखनीय यह है कि मुख्यमंत्री का सवाल शिक्षिका से था कि क्या शिक्षिका ने नियुक्ति वक्त कोई अन्य शपथ पत्र दाखिल किया था कि वे सुगम में रहना चाहती है। इस सवाल का जबाव इतनाभर बनता है कि वह 25 वर्षो से दुर्गम में तैनात है। वर्तमान में उनके पति की मृत्यु हो चुकी है और पारिवारिक समस्या उनके सामने खड़ी है। शिक्षिका का कसूर मुख्यमंत्री के सवाल के बाद खड़ा होता है। यह माना जा रहा है कि शिक्षिका अपने विभाग के सामने सालो से गुहार लगा चुकी है और उसकी सुनाई नहीं हो रही है। शिक्षिका के पास अन्तिम रास्ता मुख्यमंत्री से अपनी दासतां को सुनाना था। पर वहां तो मुख्यमंत्री ने शिक्षिका की समस्या का समाधान नही किया बल्कि अपने सवालो से और समस्या खड़ी कर दी। यही वजह है कि शिक्षिका के पास जबाव नहीं था और मुख्यमंत्री के पास समाधान नहीं था। अर्थात जब सूबे के मुखिया के पास समाधान ना हो तो उस राज्य की व्यवस्था कैसी चल रही होगी यह उतरा का उतर ही बता रहा है।
अब इधर तरह-तरह के राजनीतिक कयास लगाये जा रहे है। लोग चर्चाओं का विषय बना रहे हैं कि जनता दरबार में हंगामा करने वाली शिक्षिका उत्तरा पंत बहुगुणा मुख्यमंत्री पद से त्रिवेंद्र सिंह रावत की विदाई की वजह बन सकती हैं। पूरे देश में इस प्रकरण की भत्र्सना हो रही है और मुख्यमंत्री एवं उक्त शिक्षिका के व्यवहार को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। परन्तु इस मामले में भाजपा की खासी छीछालेदर हुई है। जिस कारण भाजपा हाईकमान भी असहज हो उठा है। दूसरी ओर नेशनल मीडिया में एक बार फिर से सीएम त्रिवेंद्र रावत की विदाई की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
राजनीतिक बौखलाहट
बताया जा रहा है कि कांग्रेस शासनकाल में भी उक्त शिक्षिका को सेवा समाप्ति का नोटिस दिया गया था। इधर राज्यभर में कांग्रेस द्वारा किए गए प्रदर्शन को भाजपा ने राजनीतिक बौखलाहट बताया है। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रमुख डा0 देवेंद्र भसीन ने कहा कि शिक्षिका प्रकरण को लेकर कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री का पुतला जलाया जाना निंदनीय है। उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में भाजपा की सरकार जिस तरह श्रेष्ठ कार्य कर रही है उससे कांग्रेस परेशान है। भ्रष्टाचार के खिलाफ की जा रही कार्यवाही से भी कांग्रेस नेता चिंता में हैं। उन्होंने कहा निलम्बित शिक्षिका को स्कूल से लगातार अनुपस्थित रहने पर कांग्रेस शासन के समय 24 सितम्बर 2016 को सेवा समाप्ति का नोटिस दिया गया था। डा॰ भसीन ने कहा कि मामला नियम व प्रशासनिक है न कि महिला अपमान का। उन्होंने कहा कि जिस तरह कांग्रेस इस मामले पर सक्रिय हो गई है और सोशल मीडिया पर शिक्षिका की 27 जून की एक पोस्ट सामने आई है उससे इस प्रकरण में साजिश की सम्भावना भी सामने आ रही है।तबादला बनाम दुर्गम
सुगभ और दुर्गम जैसे शब्द शिक्षक व शिक्षा विभाग में हमेशा चर्चाओं में रहे हैं। शिक्षा विभाग में ऐसे शिक्षक भी हैं जो दुर्गम में बच्चों के भविष्य संवारने में लगे हैं। उन्हे सरकारी स्तर पर कभी भी तब्बजो नहीं दी गई है। इधर राजनीतिक हालातो पर गौर करेंगे तो राजनीति के मार्फत सत्ता की लोलुपता में चकनाचूर राजनेता अपनी-अपनी पत्नीयों को कैसे सुगम में रखकर खुद की सेवामें तैनात करते है, उसकी बानगीभर है। गौरतलब हो कि मौजूदा मुख्यमंत्री की पत्नी 22 सालों से सुगम में सेवा दे रही हैं। वित्त मंत्री प्रकाश पंत की पत्नी देहरादून के राजपुर रोड़ स्थित जीआईसी में तैनात है। टिहरी से बीजेपी के विधायक धन सिंह नेगी की पत्नी अनिता नेगी भी देहरादून के राजपुर रोड़ स्थित जीजीआई में 2009 से मौजूद हैं। प्रताप नगर से कांग्रेस के पूर्व विधायक विक्रम सिंह नेगी की पत्नी सुशीला नेगी देहरादून के मेंहूवाला इंटर काॅलेज में तैनात हैं, जिनका तबादला टिहरी जिले से कांग्रेस के शासन काल में 2014 में देहरादून हो गया था। अब जब उत्तराखंड के मुख्यमंमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और भाजपा कांग्रेस के विधायकों की पत्नियां सुगम में सेवाएं दे रही हैं तो भला शिक्षा मंत्री रहते मंत्री प्रसाद नैथानी कैसे अपने रिश्तेदरों को देहरादून न लाते। मंत्री प्रसाद नैथानी के शाले सुरेंद्र डंगवाल देहरादून डायट में कई सालों से तैनात हैं इधर मंत्री प्रसाद नैथानी के दमाद प्रेमनगर के पास जमाई कोटला इंटर काॅलेज स्कूल में तैनात हैं। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष ज्योति प्रसाद गैरोला की पत्नी भी देहरादून स्थित शिक्षा निदेशालय में पिछले एक साल पहले एटैचमेंट पर पहुंच गई हैं। इस तरह सांसद भी पीछे क्यों रहे। उच्च शिक्षा विभाग में तैनात उत्तराखंड से भाजपा के राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी की पत्नी तो हल्द्वानी डिग्री काॅलेज से देश की राजधानी दिल्ली में स्थानीय आयुक्त कार्यालय में कुछ साल पहले एटैचमेंट पर पहुंच गई।बता दें कि राजनीति में आने की वजह सभी नेतागण जनता की सेवा करना बताते हैं, लेकिन अपने करीबियों को कैसे राजनीतिक पहुंच के चलते सभी नेता सुख सुविधा वाली जगह पर तैनाती दिलाना चाहते हैं यह उत्तराखंड राज्य ही देशभर में उदाहरण बन सकता है। ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजमी है कि जिसकी राजनैतिक पहुंच है उसके अपने ही सुख सुविधा वाली जगह नौकरी कर सकते हैं और जिनकी पहुंच राजनीति में शून्य के बराबर है वह उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देते रहेंगे। यह बात तब सामने आई जब मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शिक्षिका उतरा पन्त बहुगुणा को फटकार लगाई और गिरफ्तार तथा निलम्बन के आदेश दिये। जो प्रदेश के प्रथम व्यक्ति के व्यक्तित्व पर सवाल खड़ा करता है।
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Now there are various types of political concepts being implemented. People are making a topic of discussion that Uttartar Pant Bahuguna, a teacher in the public court, may be the reason for the departure of the Chief Minister by the Chief Minister.











