Saturday, May 12, 2018

रंवाई लोक महोत्सव 2018 की तैयारी जोरो पर

रंवाई लोक महोत्सव 2018 की तैयारी जोरो पर




वैसे तो कई दफा रंवाई घाटी यानि नौगांव, बड़कोट, पुरोला व मोरी में रंवाई महोत्सव का आयोजन हुआ। 2018 में दूसरी बार आयोजित नौगांव स्थित में रंवाई लोक महोत्सव का अगाज आगामी अक्टूबर माह में होने जा रहा है। बता दें कि जहां एक ओर रंगारंग कार्यक्रमो की धूम रहेगी वहीं रंवाई क्षेत्र के वरिष्ठ साहित्यकार भी अपनी लोक भाषाओं को लेकर विशेष तौर पर रंवाल्टी कवि सम्मेलन आकर्षक केन्द्र रहेगा। बीट्स आॅफ यमुना वैली, रंवाई घाटी के लोकल बैण्ड की टालियों की विशेष प्रस्तुतिया चार चांद लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। महोत्सव की खास पेशकश दौलतराम रंवाल्टा सम्मान, पतिदास सम्मान, राजेन्द्र सिंह रावत सम्मान, बर्फियालाल जुवांठा सम्मान और जोतसिंह रंवाल्टा सम्मान, रंवाई गौरव सम्मान पाने वालो की झलक देखने व सुनने को मिलेगी।

रंवाल्टी कवि सम्मेलन के लिए अब तक साहित्यकार महावीर रंवाल्टा, युवा कवि दिनेश रावत, प्रसिद्ध लोक कवि व गायक ओम बंधानी, पौड़ी से वरिष्ठ पत्रकार और लोक कवि गणेश खुगशाल गणी, साहित्यकार सुरेन्द्र सिंह पुण्डीर, साहित्यकार ध्यान सिंह रावत, युवा कवि व पत्रकार नीरज उत्तराखण्डी से भी ‘‘रंवाई लोक महोत्सव’’ के लिए सम्पर्क किया गया है।

रंवाई लोक महोत्सव 2018 की विशेषता

दौलतराम रवांल्टा सम्मान - स्व. रवांल्टा आजादी के बाद व पूर्व से ही क्षेत्र के विकास के लिए ताउम्र संघर्षरत रहे। उन्हीं की बदौलत यमुनाघाटी में दिल्ली से यमनोत्री मोटर मार्ग का निर्माण हुआ। ऐसे कई विकास के काम रवांल्टा जी के नेतृत्व में हुए जिनकी क्षेत्र में एक मिशाल कायम है। स्थानीय लोग उन्हें विकास का मसीहा मानते हैं। पहली बार उनके नाम से ऐसा आयोजन किया जा रहा है। क्षेत्रीय विकास और जनमुद्दों पर रचनात्मक कार्य करने वाले व्यक्तित्व को यह सम्मान ‘‘समाज सेवा’’ के क्षेत्र में दिया जाता है।
पति दास सम्मान - स्व. पतिदास आजादी से पूर्व प्रजामंडल की विधानसभा के सदस्य रहते हुए भी उन्होंने उन दिनों यमुनाघाटी और सम्पूर्ण पहाड़ में सभी के लिए शिक्षा जैसे अभियान कार्यक्रम का नेतृत्व किया। यही नहीं वे आजादी के बाद अंतरिम सरकार यानी उत्तर प्रदेश सरकार में भी विधानसभा सदस्य रहे। उन्होंने समतामूलक समाज की कल्पना को साकार करने के लिए सर्वोदय कार्यकर्ता के रूप में गांव-गांव कैंप फायर जैसे कार्यक्रम का नेतृत्व किया। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ठ/मेधावी छात्र-छात्राओं को यह ‘मेधावी सम्मान’ दिया जाता है।
राजेन्द्र सिंह रावत सम्मान - स्व. रावत उत्तराखण्ड (तब उतर प्रदेश) के ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने खुद के गांव बीफ में लोक सहभागीता से चकबन्दी करवा करके चकबन्दी का आन्दोलन इस पर्वतीय राज्य में फैलाया। हालांकि राज्य बनने के बाद यह आन्दोलन सरकारी दफ्तरो की धूल फांकता रहा क्योंकि तब तक वे शारीरिक रूप से असमर्थ हो चुके थे। जबकि वे ब्लॉक प्रमुख, जिलापंचायत अध्यक्ष के पद पर रहते हुए भी वे लोगो के घर-घर विकास के कार्यों को क्रियान्वन के लिए पंहुचते थे। वे राजनीतिक कार्यकर्ता कम और एक सामाजिक कार्यकर्ता थे। वे गढवाल के पहले व्यक्ति थे जो ताउम्र लोक सेवा में रमे रहे। कृषि, स्वावलंबन की दिशा में कार्य करने वाले व्यक्तित्व को इस सम्मान से नवाजा जाता है।
बर्फियाला जुवांठा सम्मान - स्व. जुवांठा यमुनाघाटी में ही नहीं अपितु पूरे उत्तराखण्ड में विकास पुरुष के रूप में जाने जाते हैं। वे यमुनाघाटी में आशा की किरण से भी जाने जाते हैं। श्री जुवांठा ऐसे निम्न परिवार में जन्में जो कभी सपना भी नहीं देख सकते थे कि उनका यह बालक कभी इलाहबाद जैसे विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति से लेकर तत्काल उत्तर प्रदेश में विकास की एक नई इबारत लिखेगा। वे तत्काल उत्तर प्रदेश में पर्वतीय विकास मंत्री रहे हैं। उन्होंने राज्य आन्दोलन की अगुवाई में अभूतपूर्व सहयोग करके तत्काल सत्ता में बैठी राजनीतिक पार्टी को उत्तराखण्ड राज्य के लिए अलविदा कह दिया। सौम्य स्वभाव और साहित्य रचना एवं विकास पर उनकी अच्छी पैठ थी। साहित्यकी, रचना, लोक संस्कृति व जनमुद्दों पर आधारित लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तित्व को इस सम्मान से सम्मानित किया जाता है।
जोतसिंह रंवाल्टा सम्मान - श्री रंवाल्टा रंवाई घाटी के ऐसे योद्धा थे जिन्होने तिलाड़ी के शहीदो को शहीद सम्मान, रंवाई के विकास के लिए उनके पास 15000 पत्रो का जखीरा बताता है कि वे ताउम्र रंवाई के विकास के लिए सत्ता से लड़ते रहे। उनके महत्वपूर्ण कार्यो को सलाम करते हुए इस बार उनके नाम का सम्मान ऐसे ही व्यक्तित्व को दिया जायेगा।
रंवाई गौरव सम्मान - रंवाई लोक महोत्सव की टीम ने यह निर्णय लिया कि इस वर्ष से वे रंवाई घाटी के ऐसे युवा-युवति को रंवाई घाटी की जनता से सम्मानित करवाना चाहते हैं जिन्होने अन्तर्राष्टीय स्तर पर अपनी योग्यता की छाप छोेड़ी हो।

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